
प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
Kanpur: कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर सामने आया विवाद अब जांच के घेरे में है। आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से नगर निगम के टेंडरों में फिक्सिंग और कमीशनखोरी का कथित खेल चल रहा था। मामले में एक ठेकेदार सिंडिकेट की भूमिका सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है।
आरोपों के मुताबिक, ठेकेदारों के एक नेटवर्क के जरिए टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया जाता था। दूसरे ठेकेदारों पर दबाव बनाकर उन्हें तय शर्तों के मुताबिक बोली लगाने के लिए मजबूर करने और फिर समान दरों पर टेंडर खुलवाने का आरोप है।
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, समान दरों पर टेंडर खुलने के बाद लॉटरी की प्रक्रिया के जरिए पसंदीदा ठेकेदारों और फर्मों को काम दिलाने का कथित खेल चलता था। इस नेटवर्क में गोविंद शर्मा का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
गोविंद शर्मा को कथित नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर से कार्रवाई की गई है। नगर निगम के विवादित 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर निरस्त किए जा चुके हैं। इसके बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर की ओर से पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।
एसआईटी टेंडर से जुड़े दस्तावेजों, फर्मों की भूमिका और कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके की पड़ताल कर रही है।
जांच में सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में दो आरोपितों की गिरफ्तारी भी हो चुकी थी।
मुख्य आरोपित बताए जा रहे गोविंद शर्मा के फरार होने की जानकारी है। केडीए की ओर से उसके आवास को भी सील किया गया है। पुलिस उसकी तलाश के साथ ही मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
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इस मामले में जेल भेजे गए दो आरोपित ठेकेदारों को अब अदालत से राहत मिली है। करीब 14 दिन पहले जेल गए संदीप जैन और किदवई नगर निवासी रज्जन बाजपेई को एडीजे-19 की अदालत ने जमानत देने का आदेश दिया है।
अदालत ने दोनों आरोपितों को एक-एक लाख रुपये के दो जमानती और निजी मुचलके की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। यानी एसआईटी की जांच जारी रहने के बीच दोनों आरोपित अब जेल से बाहर आ सकेंगे।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर टेंडर प्रक्रिया में लंबे समय से गड़बड़ी का कथित खेल चल रहा था तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या रही? इतने बड़े मूल्य के टेंडरों में दस्तावेजों की जांच और मंजूरी किस स्तर पर हुई?
एसआईटी अब इस पहलू को भी खंगाल रही है। जांच में अधिकारियों की संलिप्तता या लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
फिलहाल जांच एजेंसी का फोकस ठेकेदारों, फर्मों, टेंडर दस्तावेजों और कथित नेटवर्क के बीच संबंधों पर है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर निरस्त होने और कई फर्मों पर कार्रवाई के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
वहीं, दो आरोपित ठेकेदारों को जमानत मिलने के बाद मामले में नया मोड़ आया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित टेंडर फिक्सिंग का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें ठेकेदारों के अलावा किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। एसआईटी की जांच आगे बढ़ने के साथ तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
Location : Kanpur
Published : 9 September 2026, 2:43 PM IST