
चाचा की साजिश ने कैसे खत्म कर दी अमर प्रेम कहानी (सोर्स-Pinterest)
New Delhi: हीर-राझा की प्रेम कहानी दुनिया की सबसे प्रिय कलाकारों में गिनी जाती है। यह सिर्फ दो प्रेमियों की कहानी नहीं है, बल्कि सामाजिक बंदिशों, पारिवारिक विरोध और अंतिम सांस तक खेले गए प्रेम का प्रतीक है। पंजाब की इस अमर लोककथा को सूफी कवि वारिस शाह ने अपनी रचना अमर कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि अगर पिछली बार कोई स्टोरी नहीं बनी, तो शायद उनकी और रांझा की कहानी का अंत कुछ और हुआ।
लोककथाओं के अनुसार, तख्त हजारा गांव में रहने वाला ढीदो रांझा अपने परिवार का सबसे छोटा बेटा था। उसे खेती-किसानी से ज्यादा बांसुरी वादक का शौक था। उनकी मधुर धुन सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। पिता के निधन के बाद संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार में विवाद बढ़ गया और उनके शिष्यों के व्यवहार से नाराज होकर राझा ने घर छोड़ने का निर्णय लिया। यही यात्रा उसे हीर तक ले गई, जहां दोनों के बीच प्रेम था।
प्रेम प्रसंग बना खून-खराबे की वजह, सीतापुर में भाई पर बहन की हत्या का आरोप
हीर और रांझा के प्रेम को परिवार ने स्वीकार नहीं किया था। दोनों को अलग करने के लिए हीर का विवाह किसी और से कराया गया। अपनी प्रेमिका से बिछड़ने के बाद रांझा ने पवित्र जीवन त्यागकर जोगी का वेष धारण कर लिया। वर्षों बाद दोनों की फिर मुलाकातें हुईं और लंबे संघर्ष के बाद पारिवारिक विवाह पर सहमति बनी।
लोककथाओं के अनुसार, जब हीर और रांझा का विवाह होने वाला था, तब हीर के चाचा रांझो (कायदो) ने इस विरोध का विरोध किया। कहा जाता है कि उसने हीर को जहर मिला खाना खिलाया। जब रांझा को यह पता चला तो वह भी अपने पास पहुंच गया और उसी जहर को अपनी जान दे दी। इस तरह शादी से पहले ही दोनों की प्रेम कहानी ट्रै अंत तक पहुंच गई।
Rahul निकला Faizan: दोस्ती, ब्लैकमेल और मौत… 16 साल की छात्रा की दर्दनाक कहानी
कहा जाता है कि दोनों प्रेमियों को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झंग क्षेत्र में एक ही स्थान पर दफनाया गया था। आज भी वहां उनके मजार पर लोग साधू प्रेम की मिसाल चढ़े हुए लोग स्थित हैं। हिर-रांझा की कहानी 'छोठ' बाद भी प्रेम, त्याग और वंदन के प्रतीक के रूप में याद की जाती है।
Location : New Delhi
Published : 4 August 2026, 1:19 PM IST