मेरठ के सरधना के कपसाड़ गांव में अपहृत युवती के मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया। प्रशासन के लिखित आश्वासन और मुआवजे के बाद पीड़ित परिवार अंतिम संस्कार को तैयार हुआ। गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा और माहौल दिनभर तनावपूर्ण बना रहा।

कपसाड़ कांड
Meerut: मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में अपहृत युवती के मामले को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर रही। शुक्रवार को सपा विधायक अतुल प्रधान और भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सूद गांव पहुंचे। सपा विधायक ने पीड़ित परिवार को अपनी ओर से दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से तीन लाख रुपये देने की बात कही। इस दौरान पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा भी दिया गया।
आसपा (आजाद समाज पार्टी) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बातचीत की। उन्होंने परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन देते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की लड़ाई है। उनके इस आश्वासन से पीड़ित परिवार को कुछ हद तक संबल मिला।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा भी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया। भाजपा नेताओं की मौजूदगी से साफ हो गया कि मामला अब राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो चुका है।
स्थिति हाथ से निकलती देख पूर्व विधायक संगीत सोम स्वयं पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे। प्रशासन की मध्यस्थता में समझौते की पटकथा तैयार की गई। पुलिस प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि 48 घंटे के भीतर अपहृत युवती की बरामदगी की जाएगी। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल में नौकरी, शस्त्र लाइसेंस, दस लाख रुपये का मुआवजा और पुलिस सुरक्षा देने की बात कही गई।
लगातार आश्वासन और लिखित समझौते के बाद पीड़ित परिवार सुनीता का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हो गया। रात करीब पौने आठ बजे अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बेटे नरसी ने मां को मुखाग्नि दी। इस फैसले से भाजपा नेताओं ने राहत की सांस ली, हालांकि विपक्षी दलों ने सरकार पर हमले तेज कर दिए।
शुक्रवार को कपसाड़ गांव में पूरे दिन घटनाक्रम बदलता रहा। सपा विधायक अतुल प्रधान को जब गांव में जाने से रोका गया तो पीड़ित परिवार स्वयं गांव से बाहर आकर उनसे मिला। इस दृश्य ने भाजपा नेताओं को चिंता में डाल दिया। पार्टी के सामने ठाकुर समाज को नाराज न करने और दलित समुदाय को भी संतुष्ट करने की बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने गांव में पहुंचकर मोर्चा संभालने की कोशिश की।
परिजनों ने पहले स्पष्ट कर दिया था कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी और बेटी की बरामदगी नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी और कांग्रेस नेताओं को गांव की सीमा पर रोक दिया गया, जिससे नाराज होकर सभी लोग गांव के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान पुलिस और नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
धरने के दौरान सबसे मार्मिक क्षण तब आया, जब सुनीता का बड़ा बेटा नरसी रोते हुए विधायक अतुल प्रधान से लिपट गया। उसने सिसकते हुए पूछा, “विधायक जी, बस इतना बता दो, मेरी बहन अब वापस आएगी या नहीं?” यह सवाल सुनकर मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
सुनीता का छोटा बेटा शिवम एसपी देहात अभिजीत कुमार के सामने भावुक हो गया। उसने सवाल उठाया कि यदि तय समय में उसकी बहन बरामद नहीं होती तो क्या जिम्मेदार अधिकारी अपनी वर्दी उतार देंगे। इस सवाल पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि अपराध पुलिस ने नहीं किया, फिर भी मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
गांव की महिलाओं और समाजसेवी नेहा गौड़ ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं ने पुलिस को चूड़ियां दिखाकर लापरवाही का आरोप लगाया। महिला पुलिसकर्मियों ने किसी तरह स्थिति को संभाला।
तनाव के चलते कपसाड़ गांव की गलियां शाम तक सूनसान रहीं। हर गली और चौराहे पर पुलिस बल तैनात रहा। ग्रामीणों ने बच्चों को घरों से बाहर नहीं निकलने दिया। सीमाएं सील होने के कारण नौकरीपेशा लोग भी गांव से बाहर नहीं जा सके।
अपहृत युवती का दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लग सका। नामजद आरोपी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहे। करीब 19 घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन के लिखित आश्वासन पर मामला शांत हुआ।