10 लाख नहीं, 20 लाख भी नहीं… पूरे 40 लाख का डाका; देवघर में ‘नकली अफसरों’ का गिरोह ऐसे हुआ बेनकाब

देवघर के जसीडीह में खुद को GST अधिकारी बताकर 40.50 लाख रुपये की लूट के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर स्कॉर्पियो, 4.30 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, मोबाइल, लाल-नीली बत्ती और पुलिस डंडा बरामद किया है।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 19 August 2026, 3:48 PM IST
google-preferred

Deoghar: झारखंड के देवघर जिले के जसीडीह थाना क्षेत्र में कथित तौर पर खुद को GST अधिकारी बताकर लूट की वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 8 अगस्त को दर्ज मामले की जांच के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से पुलिस की पहचान और सरकारी कार्रवाई जैसा माहौल बनाने वाले सामान के साथ नकदी, मोबाइल और लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोप सिर्फ सड़क पर लूट का नहीं, बल्कि फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर रास्ता रोकने, लोगों को डराने, अगवा करने और लाखों रुपये लूटने का है। पुलिस के मुताबिक वारदात में करीब 40 लाख 50 हजार रुपये नकद के साथ मोबाइल फोन और लैपटॉप लूटे जाने की बात सामने आई थी।

पुलिस के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को वादी विक्रम चौधरी के लिखित आवेदन पर जसीडीह थाना कांड संख्या 269/2026 दर्ज किया गया। आरोप है कि अज्ञात स्कॉर्पियो सवार अपराधियों ने मुख्य सड़क पर वादी की मोटरसाइकिल को रोककर खुद को GST पदाधिकारी बताया। इसके बाद वादी और उसके साथ मौजूद कर्मचारी को रुपये से भरे बैग के साथ कथित तौर पर अपने कब्जे में लिया गया और करीब 40.50 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि लूट लिए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए देवघर के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर छापामारी टीम बनाई गई। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस पांच संदिग्धों तक पहुंची। गिरफ्तार आरोपियों में कुमोद पोदार, संजय कुमार सिंह, शिव शंकर कुमार, घनश्याम यादव और विनोद प्रसाद यादव शामिल हैं।

बरामदगी ने बढ़ाए सवाल

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के पास से वह स्कॉर्पियो भी बरामद हुई है, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर JH01BP-4780 बताया गया है।लेकिन इस मामले में सबसे दिलचस्प बरामदगी सिर्फ गाड़ी नहीं है।

पुलिस ने एक लाल-नीली बत्ती वाला पुलिस लाइट बोर्ड, एक पुलिस डंडा, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी बरामद किया है। यानी जिस तरीके से सरकारी कार्रवाई का माहौल बनाकर लोगों को डराने का आरोप है, बरामद सामान उस कथित तरीके की ओर इशारा करता है।कुमोद पोदार के निशानदेही पर पुलिस को 500 रुपये के 840 नोट यानी 4 लाख 20 हजार रुपये और 200 रुपये के 50 नोट यानी 10 हजार रुपये बरामद हुए। इस तरह अकेले इस बरामदगी में 4 लाख 30 हजार रुपये नकद मिले।इसके अलावा एक Dell कंपनी का लैपटॉप भी बरामद किया गया है।

वहीं शिव शंकर कुमार की निशानदेही पर एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसमें पुलिस के अनुसार घटनास्थल से जुड़े स्थान और आने-जाने वाली सड़क का मैप मौजूद था।
यानी पुलिस की बरामदगी सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहन और सरकारी तंत्र जैसा प्रभाव पैदा करने वाले सामान तक पहुंची है।

Deoghar Shravani Mela 2026 : इस बार वीआईपी भी कतार में? प्रशासन के एक फैसले से मची खलबली!

पांचों आरोपियों का रिकॉर्ड भी खंगाला गया

इस पूरे मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू गिरफ्तार आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। पुलिस के दस्तावेज के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी कुमोद पोदार, उम्र करीब 34 वर्ष, के खिलाफ सिमुलतला थाना कांड संख्या 104/2025, दिनांक 8 दिसंबर 2025, में BNS की धाराओं 319(2), 318(4), 305(A) और 3(5) के तहत मामला दर्ज है। इसके अलावा धनवार थाना कांड संख्या 97/2026, दिनांक 2 अप्रैल 2026, में भी उसके खिलाफ BNS की धाराओं 316(2), 318(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

यानी जिस आरोपी पर इस नए मामले में भी गंभीर आरोप लगे हैं, उसका नाम पुलिस रिकॉर्ड में दिसंबर 2025 और अप्रैल 2026 के मामलों में भी सामने आ चुका है।
इसके अलावा पुलिस रिकॉर्ड में एक अन्य आरोपी के खिलाफ 2012 का मामला भी दर्ज होने की जानकारी है। हलसी टाउन थाना कांड संख्या 57/2023, दिनांक 24 जनवरी 2023, में बिहार मद्य निषेध अधिनियम से जुड़ा मामला दर्ज होने की बात भी दस्तावेज में दर्ज है।

देवघर नगर थाना में वर्ष 2025 का मामला भी पुलिस रिकॉर्ड में सामने आया है, जिसमें भारतीय विद्युत अधिनियम की धाराओं 135/138 के तहत कार्रवाई का उल्लेख है।

सिर्फ लूट नहीं, ‘सरकारी अफसर’ का डर भी जांच का हिस्सा

इस केस में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अपराधियों को GST अधिकारी बनने की जरूरत क्यों पड़ी?
सड़क पर किसी व्यक्ति को रोककर सिर्फ लूटपाट करना एक बात है, लेकिन खुद को सरकारी अधिकारी बताकर कार्रवाई का डर पैदा करना पूरी वारदात को अलग स्तर पर ले जाता है।

अगर जांच में यह बात पुष्ट होती है कि आरोपियों ने जानबूझकर GST विभाग के नाम का इस्तेमाल किया, पुलिस जैसी लाल-नीली बत्ती और डंडे का इस्तेमाल किया तथा सरकारी कार्रवाई का भय दिखाकर लोगों को निशाना बनाया, तो यह सिर्फ सामान्य सड़क लूट का मामला नहीं रह जाता।

यही वजह है कि इस मामले में पुलिस की आगे की जांच यह पता लगाने पर भी महत्वपूर्ण होगी कि क्या गिरोह ने पहले भी इसी तरीके से किसी कारोबारी, व्यापारी या नकदी लेकर चलने वाले व्यक्ति को निशाना बनाया था?

Deoghar: रेलवे स्टेशन से मंदिर मार्ग तक दहशत फैलाने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार, चोरी की चांदी और वारदात में इस्तेमाल स्कूटी बरामद

40.50 लाख का सवाल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ

इस मामले में एक और बड़ा सवाल है 40 लाख 50 हजार रुपये की कथित लूट में से पुलिस ने कितनी रकम बरामद की?

प्रेस विज्ञप्ति में कुमोद पोदार की निशानदेही पर 4.30 लाख रुपये की नकदी बरामदगी का उल्लेख है। साथ ही लैपटॉप, मोबाइल और अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं।
इस लिहाज से जांच का अगला महत्वपूर्ण बिंदु यही होगा कि बाकी रकम कहां गई, क्या वह अन्य आरोपियों के पास पहुंची, क्या किसी तीसरे व्यक्ति के पास रकम रखी गई और क्या इस पूरी वारदात में और लोग भी शामिल हैं।

जांच टीम में पुलिस के कई अधिकारी

पुलिस ने इस कार्रवाई के लिए जसीडीह थाना और तकनीकी शाखा के अधिकारियों-कर्मियों को शामिल किया था। छापामारी दल का नेतृत्व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी स्तर के अधिकारी के निर्देशन में किए जाने की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।
पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब देवघर में श्रावणी मेला चल रहा है और जिले में बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले लोग, व्यापारी और कारोबारी मौजूद हैं। ऐसे माहौल में सड़क पर सरकारी अधिकारी बनकर किसी को रोकने की कोशिश सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

अब आगे की जांच पर नजर

फिलहाल पांचों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनके आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है। बरामद स्कॉर्पियो, मोबाइल फोन, लैपटॉप, लाल-नीली बत्ती और पुलिस डंडे जैसे सामान को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

सबसे अहम बात यह है कि क्या 40.50 लाख रुपये की कथित लूट के पीछे सिर्फ यही पांच लोग थे या इस नेटवर्क में और चेहरे भी शामिल हैं? और क्या GST अधिकारी बनकर लूटने का यह तरीका पहली बार इस्तेमाल हुआ या पहले भी इसी अंदाज में वारदातें की गईं? इन सवालों का जवाब पुलिस की आगे की जांच और पूछताछ से ही सामने आएगा।

फिलहाल इतना जरूर है कि देवघर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह तक पहुंचने का दावा किया है, जिस पर सरकारी अधिकारी की पहचान और रौब का इस्तेमाल कर लाखों रुपये की लूट करने का आरोप है। बरामद सामान और आरोपियों का पुराना रिकॉर्ड इस पूरे मामले को सामान्य लूट की घटना से कहीं ज्यादा गंभीर बनाता है।

Location :  Deoghar

Published :  19 August 2026, 3:48 PM IST

Related News

Advertisement