
राम मंदिर (Img- Pinterest)
Ayodhya: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच आखिरकार 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। इस मामले में आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है। मामला सिर्फ चढ़ावे की चोरी तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि अब जांच मंदिर की पूरी व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति और निगरानी प्रणाली तक पहुंचती नजर आ रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई सिर्फ उन लोगों तक सीमित रहेगी जिनके नाम FIR में हैं या फिर जांच की आंच उन लोगों तक भी पहुंचेगी जिनके हाथों में व्यवस्था की जिम्मेदारी थी।
ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर दर्ज हुई FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्रीराम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत भी मामला दर्ज किया है। इसके अलावा जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम यानी SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद यह FIR दर्ज हुई है। जांच टीम ने मामले की शुरुआती पड़ताल में दान की गिनती, रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, SIT की रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई। दान की गिनती से लेकर उसकी निगरानी और रिकॉर्डिंग तक की प्रक्रिया में खामियां सामने आई हैं।
SIT की जांच में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई कर्मचारी बिना किसी लिखित नियुक्ति आदेश के काम कर रहे थे। इतना ही नहीं, कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच और सत्यापन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ऐसे लोगों को कैसे दी गई और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।
जांच के दौरान SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी कई अहम सवाल पूछे। उनसे पूछा गया कि दान की गिनती करने वाले कर्मचारी कौन थे, उनकी नियुक्ति किसके आदेश से हुई, दानपात्र से पैसा निकालने से लेकर बैंक में जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया क्या थी। इसके अलावा CCTV कैमरों की निगरानी, रिकॉर्डिंग व्यवस्था और कर्मचारियों की तलाशी जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल किए गए। SIT ने ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की। उनसे नकदी गिनती के समय मौजूदगी, कर्मचारियों की जांच, CCTV व्यवस्था और कैश के हिसाब-किताब से जुड़े कई सवाल किए गए।
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी पहले प्रबंधन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर तय नियमों का सही तरीके से पालन किया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने यह भी माना था कि निगरानी व्यवस्था कमजोर रही और प्रशासनिक अनुभव की कमी दिखाई दी। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया था कि ट्रस्ट के अधीन एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए, जो पूरी व्यवस्था को स्वतंत्र रूप से संभाल सके।
Location : Ayodhya
Published : 26 June 2026, 4:47 PM IST