बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री पर हाईकोर्ट सख्त, डाउनलोड करना और देखना भी पड़ सकता है भारी

बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की ई-पुस्तिका में एक अहम कानूनी पहलू सामने आया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख है, जिसमें ऐसी सामग्री को डाउनलोड करने, देखने या अपने पास रखने को लेकर कानून की स्थिति स्पष्ट की गई थी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 4 October 2026, 4:47 PM IST

Prayagraj: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम कानूनी पहल को सामने रखा है। कोर्ट की ई-पुस्तिका के छठे संस्करण में ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों को शामिल किया गया है, जिनमें बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री के इस्तेमाल और उसे रखने से जुड़े कानूनी पहलुओं को स्पष्ट किया गया है।

इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का भी जिक्र है, जिसमें ऐसी सामग्री को डाउनलोड करने, देखने या अपने पास रखने को लेकर कानून की स्थिति बताई गई है।

ई-पुस्तिका में शामिल किए गए अहम फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से जारी ई-पुस्तिका के छठे संस्करण में बाल अपराधों से जुड़े महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों को शामिल किया गया है। इसमें जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस बनाम हरीश जैसे चर्चित मामले का भी उल्लेख किया गया है। ई-पुस्तिका का विमोचन न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह, न्यायमूर्ति समीर जैन और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने किया।

इस सीरीज में इससे पहले कई ऐतिहासिक मामलों के फैसलों का हिंदी अनुवाद प्रकाशित किया जा चुका है। इनमें चौरीचौरा, केशव सिंह, आगरा षड्यंत्र, कानपुर बम धमाका और राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी जैसे मामले शामिल हैं।

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डाउनलोड और रखने को लेकर क्या कहा गया?

ई-पुस्तिका में शामिल सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति बताई गई है। कोर्ट ने कहा था कि ऐसी सामग्री को डाउनलोड करना, देखना या अपने पास रखना भी परिस्थितियों और लागू कानून के अनुसार अपराध के दायरे में आ सकता है।

यानी मामला केवल ऐसी सामग्री बनाने या प्रसारित करने तक सीमित नहीं है। डिजिटल दौर में किसी आपत्तिजनक सामग्री को अपने डिवाइस में रखना या उसके साथ किसी तरह की संलिप्तता भी कानूनी परेशानी का कारण बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी सामग्री के लिए ‘Child Sexual Exploitation and Abuse Material’ (CSEAM) शब्द इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया था।

बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता पर जोर

फैसले में सिर्फ कानूनी कार्रवाई की बात नहीं की गई, बल्कि बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए रोकथाम और जागरूकता की जरूरत पर भी जोर दिया गया। स्कूलों में बच्चों को उम्र के अनुरूप जागरूक करने, यौन शिक्षा देने, पीड़ितों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने और समाज में जागरूकता अभियान चलाने जैसे उपायों को महत्वपूर्ण बताया गया है।

इसके साथ ही ऐसे लोगों की समय रहते पहचान करने पर भी जोर दिया गया है, जिनसे बच्चों को जोखिम हो सकता है। इसका उद्देश्य किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के साथ-साथ बच्चों को पहले से सुरक्षित रखने की व्यवस्था मजबूत करना है।

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आम लोगों के लिए भी उपयोगी होगी ई-पुस्तिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट की यह ई-पुस्तिका केवल वकीलों और न्यायिक अधिकारियों तक सीमित नहीं है। इसे विधि छात्रों, शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए भी उपयोगी बताया गया है। इसका मकसद महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना और कानूनी जानकारी को अधिक सुलभ बनाना है। ई-पुस्तिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट के ई-इलाहाबाद उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका टैब पर निशुल्क पढ़ा जा सकेगा।

Location :  Prayagraj

Published :  4 October 2026, 4:47 PM IST