सहारनपुर में 4 साल में 478 बेटियां घर छोड़ गईं, आखिर ऐसा क्या हो रहा है? आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

सहारनपुर में नाबालिग और युवतियों के घर छोड़ने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक चार साल में 478 मामले दर्ज हुए हैं। कई मामलों में सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती, प्रेम संबंध और शादी के वादे सामने आए हैं। वहीं पारिवारिक सख्ती और संवाद की कमी भी बेटियों के घर छोड़ने की वजह बन रही है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 25 August 2026, 1:06 PM IST

Saharanpur: सहारनपुर में पिछले कुछ सालों से ऐसे मामले पुलिस के लिए लगातार चुनौती बन रहे हैं। कई बार परिवार थाने पहुंचकर बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने की शिकायत दर्ज कराता है, लेकिन जांच आगे बढ़ती है तो कहानी में प्रेम प्रसंग, सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती और शादी का वादा सामने आता है। पुलिस रिकॉर्ड के आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार साल में जिले में 478 बेटियों के घर छोड़ने के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या किशोरियों और युवतियों की है। वर्ष 2026 में भी अब तक करीब 30 मामले सामने आ चुके हैं।

चार साल में सामने आए 478 मामले

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2022 में बेटियों के घर छोड़ने के 85 मामले दर्ज हुए थे। इसके बाद 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 137 पहुंच गया। वर्ष 2024 में 126 और 2025 में 100 मामले सामने आए। वर्ष 2026 में अब तक करीब 30 मामले दर्ज हो चुके हैं। आंकड़ों को देखें तो हर साल बड़ी संख्या में किशोरियों और युवतियों के घर से चले जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि सभी मामलों की वजह एक जैसी नहीं है।

सोशल मीडिया पर दोस्ती

पुलिस जांच में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें किशोरियों या युवतियों की किसी युवक से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोस्ती हुई। शुरुआत सामान्य बातचीत से होती है। धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला बढ़ता है और दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव पैदा हो जाता है। कई मामलों में सामने वाला व्यक्ति शादी करने या बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर युवती को घर छोड़ने के लिए तैयार कर लेता है। किशोरावस्था में भावनात्मक आकर्षण और रिश्तों को लेकर जिज्ञासा स्वाभाविक होती है, लेकिन अनुभव की कमी के कारण कई बार बच्चे सामने वाले व्यक्ति की बातों और उसकी असलियत के बीच अंतर नहीं कर पाते।

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हर मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा नहीं

बेटियों के घर छोड़ने के पीछे केवल प्रेम संबंध ही जिम्मेदार नहीं हैं। कई मामलों में परिवार की सख्ती और बच्चों से संवाद की कमी भी अहम वजह बनती है। पढ़ाई, दोस्तों से मिलने, मोबाइल इस्तेमाल करने या किसी रिश्ते को लेकर परिवार की नाराजगी बढ़ने पर किशोरियां भावनात्मक दबाव महसूस कर सकती हैं। ऐसे में उन्हें अगर घर में अपनी बात रखने के लिए सुरक्षित माहौल नहीं मिलता, तो कई बार वे बाहर किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा करने लगती हैं, जो उनकी बात सुनता है।

पाबंदी से ज्यादा जरूरी है संवाद

जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. इंदु सिंह के मुताबिक किशोरावस्था में भावनात्मक उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा होता है। इस दौरान परिवार से संवाद की कमी किशोरियों को बाहरी लोगों के प्रति भावनात्मक रूप से अधिक निर्भर बना सकती है। उनका कहना है कि अभिभावकों को बच्चों पर सिर्फ पाबंदी लगाने के बजाय उनसे लगातार बातचीत करनी चाहिए। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, मोबाइल इस्तेमाल के तरीके में बदलाव या किसी नए व्यक्ति से बढ़ती बातचीत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

शिकायत पर पुलिस तुरंत करती है कार्रवाई

एसएसपी सहारनपुर अभिनंदन के मुताबिक किशोरियों के गुमशुदा होने की शिकायत मिलने पर पुलिस तत्काल मुकदमा दर्ज करती है और उनकी तलाश शुरू की जाती है। कई मामलों में जांच के दौरान सामने आता है कि आरोपित ने शादी का झांसा देकर किशोरी को अपने साथ ले जाने की कोशिश की। वहीं कुछ मामलों में परिजन बहला-फुसलाकर ले जाने का मुकदमा दर्ज कराते हैं, लेकिन पूछताछ के दौरान मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा मिलता है।

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आंकड़े दे रहे हैं चेतावनी

सहारनपुर में बेटियों के घर छोड़ने के मामलों के ये आंकड़े सिर्फ पुलिस रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी चेतावनी हैं। चार साल में 478 मामले सामने आना बताता है कि किशोरियों और युवतियों से जुड़े इस मुद्दे को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। परिवारों के लिए सबसे बड़ी जरूरत बच्चों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाने की है। मोबाइल और इंटरनेट मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाना आज के दौर में व्यावहारिक नहीं है, लेकिन बच्चों को इसके सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में समझाना जरूरी है।

साल-दर-साल आंकड़े

2022: 85 मामले
2023: 137 मामले
2024: 126 मामले
2025: 100 मामले
2026: अब तक करीब 30 मामले

Location :  Saharanpur

Published :  25 August 2026, 1:06 PM IST