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New Delhi: देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति और JK Organisation के चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि हर्ष पति सिंघानिया ने कहा है कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति और उद्योगों के विकास के लिए नीति की स्थिरता (Policy Stability) अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि उद्योग जगत को सबसे अधिक आवश्यकता ऐसी नीतियों की होती है जो पूर्वानुमान योग्य (Predictable) हों।
सिंघानिया पेरिस स्थित इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के पहले वाइस-चेयरमैन और एग्जीक्यूटिव बोर्ड सदस्य हैं। वह फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) तथा ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के अध्यक्ष रह चुके हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “जब सरकार कोई नीति या योजना लेकर आती है तो उद्योग जगत चाहता है कि उसमें स्थिरता और निश्चितता बनी रहे। समय और परिस्थितियों के अनुसार कुछ संशोधन किए जा सकते हैं, लेकिन यदि नीतियों को अचानक बदल दिया जाए तो पूरी योजना और निवेश रणनीति प्रभावित हो जाती है। नीतियों में निश्चितता और स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है।”
इंटरव्यू सीरिज ‘The Candid Talk’ में वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबरेवाल आकाश से बातचीत करते हुए सिंघानिया ने कहा कि नीति निर्माण के दौरान सरकार उद्योग जगत की बात सुनती है, लेकिन दोनों पक्षों को और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “कुछ हद तक सरकार को उद्योगों की चुनौतियों और आवश्यकताओं को और गहराई से समझने की जरूरत है। वहीं उद्योग जगत को भी अपनी बात मजबूती से और समय पर सरकार तक पहुंचानी चाहिए। यदि किसी नीति पर सुझाव या फीडबैक मांगा जाए और उद्योग जगत अपनी बात ही न रखे, तो बाद में शिकायत करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।”
जब उनसे पूछा गया कि देश के कई सफल उद्योगपति बाद में विदेशों में बस जाते हैं, तो इसके पीछे क्या कारण है, उन्होंने कहा कि इसके कई कारण हैं। उन्होंने कहा, “जहां अवसर होंगे, लोग वहां जाएंगे। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि अवसर केवल विदेशों में हैं और भारत में नहीं। भारत में भी अवसरों की कोई कमी नहीं है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और यहां उद्यमिता तथा निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।”
स्टार्ट-अप संस्कृति पर अपने विचार रखते हुए सिंघानिया ने कहा कि स्टार्ट-अप्स भारतीय आर्थिक इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और भविष्य में भी उनकी भूमिका लगातार बढ़ती रहेगी।
उन्होंने कहा, “फैमिली बिजनेस मॉडल और स्टार्ट-अप्स एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक हैं। फैमिली बिजनेस भी आज प्रोफेशनल्स द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। यदि हम एलन मस्क या स्टीव जॉब्स जैसे उद्यमियों को देखें, तो हर बड़ा व्यवसाय किसी न किसी उद्यमी की सोच और पहल से ही शुरू हुआ है। कुछ मामलों में अगली पीढ़ी उस व्यवसाय को आगे बढ़ाती है और कुछ मामलों में नहीं।”
उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले MSME सेक्टर का बड़ा हिस्सा पारिवारिक व्यवसायों से ही बना है और यही मॉडल आने वाले समय में भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखेगा।
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पेपर उद्योग पर डिजिटलाइजेशन के प्रभाव के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर सिंघानिया ने स्वीकार किया कि डिजिटल तकनीक के विस्तार से प्रिंटिंग और राइटिंग पेपर सेगमेंट पर असर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद पेपर उद्योग में विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
पर्यावरणीय चिंताओं और पेपर उद्योग पर उठने वाले सवालों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उद्योग को अपने पक्ष और तथ्यों को अधिक प्रभावी ढंग से जनता और नीति निर्माताओं के सामने रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “पेपर उद्योग के पास अपने पक्ष में मजबूत तथ्य हैं, लेकिन कई बार उद्योग जगत उन्हें उतनी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाता जितना करना चाहिए। हमें पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और बेहतर ढंग से सामने लाने की जरूरत है।”
Location : New Delhi
Published : 30 May 2026, 7:52 PM IST
Topics : CMD JK Papers Group Conversation Industry Growth Harsh Pati Singhania Manoj Tibrewal Aakash The Candid Talk