
युद्ध के बीच अमेरिका से बढ़ा LPG आयात (IMG: Gemini)
New Delhi: दुनिया के एक बड़े हिस्से में जब युद्ध का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा, तब भारत के सामने सबसे बड़ी चिंता अपनी रसोई गैस की सप्लाई को लेकर थी। दशकों से भारत अपनी LPG जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर रहा है। लेकिन युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सप्लाई की मुश्किलों ने भारत को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। भारत ने संकट के बीच ऐसा रास्ता चुना, जिसने देश की LPG सप्लाई का पूरा समीकरण बदल दिया। अमेरिका से LPG आयात तेजी से बढ़ाया गया और कुछ ही महीनों में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया।
मार्च 2026 से अमेरिका से भारत का LPG आयात लगातार बढ़ने लगा। युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट से आने वाली सप्लाई पर दबाव बढ़ा तो भारत ने अमेरिकी बाजार का रुख किया। मई 2026 में भारत की कुल LPG सप्लाई में अमेरिका की हिस्सेदारी 55 फीसदी से ज्यादा पहुंच गई। इसके बाद जुलाई में अमेरिकी हिस्सेदारी करीब 73 फीसदी के स्तर तक पहुंचने का दावा किया गया।
अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपने कुल LPG आयात का करीब 50 से 55 फीसदी हिस्सा अमेरिका से मंगा रहा था। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले भारत की LPG सप्लाई का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता था।
भारत की रणनीति सिर्फ स्पॉट मार्केट से LPG खरीदने तक सीमित नहीं रही। सरकारी तेल कंपनियों इंडियनऑयल, BPCL और HPCL ने 2026 के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ करीब 22 लाख मीट्रिक टन यानी 2.2 MTPA LPG का स्ट्रक्चर्ड सालाना कॉन्ट्रैक्ट किया। इन कंपनियों में Chevron और TotalEnergies जैसी अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों का नाम सामने आया है।
युद्ध से पहले भारत की LPG सप्लाई में मिडिल ईस्ट के देशों की भूमिका बेहद बड़ी थी। UAE, कतर और सऊदी अरब मिलकर भारत की करीब 90 फीसदी LPG जरूरत पूरी करते थे। लेकिन युद्ध के दौरान हालात तेजी से बदले। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, UAE की हिस्सेदारी करीब 36 फीसदी से घटकर सिंगल डिजिट में पहुंच गई। कतर की सप्लाई में 84 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि जुलाई में सऊदी अरब से आने वाली सप्लाई का हिस्सा शून्य तक पहुंच गया।
भारत के लिए यह सिर्फ किसी एक देश से गैस खरीदने का मामला नहीं है। इसके पीछे ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी रणनीति है। अगर किसी एक क्षेत्र में युद्ध, राजनीतिक तनाव या समुद्री मार्ग से जुड़ी समस्या पैदा होती है तो उसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। होरमुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में संकट की स्थिति ने इस जोखिम को और स्पष्ट कर दिया।
भारत अब इस बदलाव को केवल तत्काल संकट की प्रतिक्रिया के तौर पर नहीं देख रहा है। सरकार ने 2027 तक देश के कुल LPG आयात का कम से कम 25 फीसदी हिस्सा सीधे अमेरिका से लाने का लक्ष्य रखा है। यह मात्रा करीब 50 लाख टन के आसपास हो सकती है। इसके लिए अमेरिका के टेक्सस और गल्फ कोस्ट क्षेत्र से सुरक्षित समुद्री रूट के जरिए LPG लाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ने का असर सिर्फ LPG बाजार तक सीमित नहीं रहने वाला। इसका संबंध दोनों देशों के व्यापक व्यापारिक रिश्तों से भी जोड़ा जा रहा है। भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है। करीब 10 से 25 अरब डॉलर तक की ऊर्जा खरीद की प्रतिबद्धता भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित बड़े व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है।
हालांकि इस पूरी रणनीति की अपनी चुनौतियां भी हैं। अमेरिका भारत से काफी दूर है। इसलिए LPG को समुद्री रास्ते से भारत तक पहुंचाने में ज्यादा समय लगता है। लंबी दूरी के कारण माल ढुलाई यानी फ्रेट रेट और इंश्योरेंस की लागत बढ़ सकती है। इसका असर LPG की कुल लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका से ज्यादा LPG खरीदने का फायदा ऊर्जा सुरक्षा के रूप में तो मिलेगा, लेकिन कीमत के मोर्चे पर चुनौती बनी रह सकती है।
Location : New Delhi
Published : 9 September 2026, 2:45 PM IST