अमेरिका-ईरान डील से तेल बाजार में भूचाल, आखिर क्यों दुनियाभर के शेयर बाजारों में आई बड़ी तेजी

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमति की खबर से वैश्विक बाजारों में उत्साह है। कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा गिरावट आई है, जबकि एशियाई, यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है।

Updated : 15 June 2026, 9:16 AM IST
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New Delhi: पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीने से अधिक समय से जारी युद्ध को लेकर बड़ी सकारात्मक खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ डील पर बातचीत पूरी हो चुकी है और इस समझौते पर 19 जून, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर सहमति बनने की खबर के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में उत्साह का माहौल दिखाई दिया। इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजारों पर देखने को मिला।

डील की खबर से बाजारों में लौटी तेजी

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर सामने आते ही एशियाई शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर माना। युद्ध के कारण पैदा हुई अनिश्चितता कम होने और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद से बाजारों में खरीदारी बढ़ी।

जापान का निक्केई इंडेक्स शुरुआती कारोबार के दौरान 4 प्रतिशत से अधिक उछल गया। जापान अपनी तेल जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को उसके लिए सकारात्मक माना जा रहा है। इसी तरह दक्षिण कोरिया का कॉस्पी इंडेक्स भी 4.3 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

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यूरोप और अमेरिका के बाजारों में भी सकारात्मक संकेत

एशियाई बाजारों के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका के बाजारों में भी तेजी के संकेत मिले हैं। यूरोप में EUROSTOXX 50 फ्यूचर्स और DAX फ्यूचर्स में 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि FTSE फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत ऊपर रहे।

अमेरिकी बाजारों में भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। S&P 500 फ्यूचर्स में 0.9 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली, जबकि तकनीकी शेयरों पर आधारित नैसडैक फ्यूचर्स में 1.5 प्रतिशत की मजबूत उछाल दर्ज की गई।

तेल और डॉलर में गिरावट से महंगाई पर राहत की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल और डॉलर की कीमतों में कमी आने से दुनिया भर में महंगाई का दबाव घट सकता है। ऊर्जा लागत कम होने से उत्पादन और परिवहन खर्च में राहत मिलेगी, जिसका सकारात्मक असर उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों पर पड़ सकता है।

इसके साथ ही कई देशों के केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपनाने की संभावना भी बढ़ गई है। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती का रास्ता आसान हो सकता है।

केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर नजर

इस सप्ताह दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला लेने के लिए बैठक करने वाले हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और रूस के केंद्रीय बैंक इस दौरान अपनी मौद्रिक नीतियों की समीक्षा करेंगे।

बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व बुधवार को ब्याज दरों को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में ही बनाए रखेगा। नए चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में यह फेड की पहली बैठक होगी, जिस पर वैश्विक निवेशकों की नजर बनी हुई है।

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कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने की संभावना के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.29 प्रतिशत गिरकर 83.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.92 प्रतिशत टूटकर 80.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

गौरतलब है कि दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते गुजरता है। युद्ध शुरू होने के बाद से एक अरब बैरल से अधिक तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। ऐसे में शांति समझौते और समुद्री मार्ग खुलने की संभावना को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  15 June 2026, 8:13 AM IST

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