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मां और बेटे उज्जवल प्रियांक की प्रेरणादायक कहानी (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Patna: बिहार की राजधानी पटना के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले उज्जवल प्रियांक की यूपीएससी की यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उज्जवल का पूरा बचपन और शुरुआती सफर काफी चुनौतियों से भरा रहा, क्योंकि उनके पिता परिवार से अलग रहते थे। इस परिस्थिति में उनकी पूरी दुनिया और प्रेरणा का एकमात्र केंद्र उनकी मां ही रहीं। तमाम आर्थिक तंगी और पारिवारिक संघर्षों के बाद भी उनकी मां ने उज्जवल की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी और उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उज्जवल की शुरुआती शिक्षा पटना के ही 'ज्ञानिकेतन स्कूल' से पूरी हुई। मेधावी छात्र होने के कारण उन्होंने 12वीं कक्षा में शानदार 96% अंक हासिल किए, जिसके चलते उन्हें स्कॉलरशिप मिल गई। इस स्कॉलरशिप ने उनकी आगे की पढ़ाई की राह को काफी हद तक आसान बना दिया। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। इस दौरान अपनी आर्थिक स्थिति को संभालने और खुद को अनुशासित रखने के लिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था। यह काम न सिर्फ उनके लिए आय का जरिया बना, बल्कि इससे उनके जीवन में अनुशासन और समय प्रबंधन की एक मजबूत नींव भी पड़ी।
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बचपन से ही मां और गुरुजनों से प्रेरणा पाने वाले उज्जवल के मन में यूपीएससी को लेकर एक खास विजन था। वह इस परीक्षा को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा और जरूरतमंदों की मदद करने का एक बड़ा माध्यम मानते थे। जहां अधिकांश छात्र यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली का रुख करते हैं, वहीं उज्जवल ने घर पर ही रहकर ऑनलाइन माध्यमों से पढ़ाई करने का कठिन फैसला लिया। उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग के पूरी तरह स्व-अध्ययन (सेल्फ स्टडी) पर भरोसा किया और अपनी रणनीति के साथ तैयारी में जुट गए।
हर यूपीएससी अभ्यर्थी की तरह उज्जवल के सफर में भी कई मुश्किलें और झटके आए। पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचने के बावजूद अंतिम सूची में नाम न आना और दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स परीक्षा पास न कर पाना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद झकझोर देने वाला था। इन असफलताओं से वह अंदर तक टूट चुके थे। ऐसे कठिन समय में उनकी मां ने उनसे एक ऐसा सवाल पूछा जिसने सब कुछ बदल दिया- "तुम रोते क्यों नहीं हो?" मां के इस सवाल ने उन्हें अहसास कराया कि उनके आंसू भीतर ही भीतर जमा हो रहे हैं। इस बात ने उन्हें अपने जज्बातों को काबू में करने और दोगुने उत्साह के साथ फिर से खड़े होने की गजब की प्रेरणा दी।
मां के अटूट विश्वास और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उज्जवल ने हार नहीं मानी और वे लगातार अपने लक्ष्य पर डटे रहे। आखिरकार उनकी वर्षों की मेहनत रंग लाई और यूपीएससी 2025 के परीक्षा परिणामों में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 10 हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा कर दिखाया। बिना किसी कोचिंग के, घर पर रहकर और तमाम अभावों को मात देकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि सही दिशा में अटूट लगन हो, तो किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है। उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां के संघर्ष और उनके असीम विश्वास को दिया है।
Location : Patna
Published : 10 August 2026, 11:45 AM IST