
प्रतीकात्मक छवि (Source Internet)
Patna: बिहार सराकर ने स्कूल में पढ़ने वालों छात्रों के लिए एक नई शुरुआत की है, जिससे अब बच्चे घर में वाली जानें वाली भाषा को स्कूलों में पढ़ सकेंगे। स्कूली शिक्षा को बच्चों की मातृभाषा और स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के लिए नई पहल की जा रही है। राज्य सरकार अब छह क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें, सप्लीमेंट्री रीडर और इंटरएक्टिव विजुअल एड्स तैयार कराएगी। इस योजना के तहत करीब 40 लाख बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए 1.20 करोड़ से अधिक नई किताबों की छपाई शुरू हो गई है। बिहार सरकार इस पूरी योजना पर लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका उद्देश्य शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को उनकी घर की बोलचाल वाली भाषा के माध्यम से पढ़ाई से जोड़ना और धीरे-धीरे उन्हें औपचारिक हिंदी सीखने में मदद करना है।
बिहार की स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) को राज्य की छह क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें और अन्य शिक्षण सामग्री तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, जिन छह भाषाओं में किताबें तैयार कराई जा रही हैं, उनमें भोजपुरी, मगही, सुरजापुरी, बज्जिका, मैथिली और अंगिका शामिल हैं।
इन भाषाओं के माध्यम से शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए केवल पारंपरिक पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर रहने के बजाय बच्चों की स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक परिवेश को भी शिक्षण सामग्री का हिस्सा बनाया जाएगा।
इस पहल के तहत शुरुआती प्राइमरी करिकुलम में कठिन व्याकरण के बजाय बच्चों की भाषा समझ और उच्चारण क्षमता यानी फोनेटिक लर्निंग पर ध्यान दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में स्थानीय लोककथाओं, कविताओं, सामुदायिक गतिविधियों, क्षेत्रीय मेलों और रोजमर्रा के सांस्कृतिक संदर्भों को शामिल किया जाएगा।
इस तरीके से बच्चों को अपने आसपास के परिवेश से जुड़ी कहानियों और उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य कक्षा में पढ़ाई को बच्चों के लिए परिचित और रुचिकर बनाना है। साथ ही, घर में बोली जाने वाली क्षेत्रीय भाषाओं से औपचारिक हिंदी की ओर बढ़ने में उनकी मदद करना है।
बिहार सरकार की इस योजना के तहत लगभग 40 लाख स्कूली बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों तक शिक्षण सामग्री पहुंचाने के लिए 1.20 करोड़ से अधिक नई किताबों की छपाई का काम भी शुरू कर दिया गया है।
इस पूरी पहल पर राज्य सरकार करीब 250 करोड़ रुपये खर्च करेगी। योजना के तहत पाठ्यपुस्तकों के साथ सप्लीमेंट्री रीडर और इंटरएक्टिव विजुअल एड्स भी तैयार किए जाएंगे, ताकि बच्चों को अलग-अलग माध्यमों से सीखने का अवसर मिल सके।
इस पहल के जरिए बिहार में शुरुआती शिक्षा को स्थानीय भाषाओं और संस्कृति से जोड़ने की तैयारी है। अब छह क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार होने वाली किताबों के माध्यम से लाखों बच्चों तक नई शिक्षण सामग्री पहुंचाई जाएगी।
Location : New Delhi
Published : 6 November 2026, 2:05 PM IST