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पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में इंजन की आवाज अपने आप एक नेचुरल वार्निंग सिस्टम की तरह काम करती है। वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों में न तो इंजन साउंड होती है और न ही कम स्पीड पर टायरों से ज्यादा आवाज आती है। आज के समय में जब अधिकतर लोग मोबाइल फोन या इयरफोन का इस्तेमाल करते हैं, तब सामने से आती साइलेंट EV का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि कई देशों में EVs से जुड़े हादसों की संख्या को लेकर चिंता जताई गई है। (Img Source: Google)
पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में इंजन की आवाज अपने आप एक नेचुरल वार्निंग सिस्टम की तरह काम करती है। वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों में न तो इंजन साउंड होती है और न ही कम स्पीड पर टायरों से ज्यादा आवाज आती है। आज के समय में जब अधिकतर लोग मोबाइल फोन या इयरफोन का इस्तेमाल करते हैं, तब सामने से आती साइलेंट EV का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि कई देशों में EVs से जुड़े हादसों की संख्या को लेकर चिंता जताई गई है। (Img Source: Google)