
New Delhi: देश में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए युवा पीढ़ी से इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का सबसे बड़ा जरिया 'वोट देने का अधिकार' है, लेकिन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के कारण यह लोकतांत्रिक अधिकार आम जनता से छीना जा रहा है।
सौरव दास ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाते हैं और नतीजों के बाद उन्हें दोबारा जोड़ लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब युवाओं का वोट देने का अधिकार ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो बेरोजगारी, पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और स्कूलों के सामाजिक ऑडिट जैसे मुद्दों पर लड़ाई लड़ना बेअसर साबित होगा। सीजेपी नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह के फैसलों से चुनाव प्रणाली की साख पर गहरा असर पड़ रहा है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बहुत जरूरी है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मीडिया रिपोर्ट में सामने आया कि देश भर में चलाए जा रहे एसआईआर (SIR) अभियान के दौरान निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने राज्यों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। चुनाव आयोग के भीतर से ही उठे इन सवालों के बाद अब विपक्षी दल और सामाजिक संगठन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
New Delhi: देश में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए युवा पीढ़ी से इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का सबसे बड़ा जरिया 'वोट देने का अधिकार' है, लेकिन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के कारण यह लोकतांत्रिक अधिकार आम जनता से छीना जा रहा है।
सौरव दास ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाते हैं और नतीजों के बाद उन्हें दोबारा जोड़ लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब युवाओं का वोट देने का अधिकार ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो बेरोजगारी, पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और स्कूलों के सामाजिक ऑडिट जैसे मुद्दों पर लड़ाई लड़ना बेअसर साबित होगा। सीजेपी नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह के फैसलों से चुनाव प्रणाली की साख पर गहरा असर पड़ रहा है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बहुत जरूरी है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मीडिया रिपोर्ट में सामने आया कि देश भर में चलाए जा रहे एसआईआर (SIR) अभियान के दौरान निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने राज्यों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। चुनाव आयोग के भीतर से ही उठे इन सवालों के बाद अब विपक्षी दल और सामाजिक संगठन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
Location : New Delhi
Published : 24 September 2026, 2:30 PM IST