Video: क्या सच साबित हुई खामेनेई की चेतावनी? यमन की जंग से थर्राया लाल सागर और वैश्विक व्यापार

यमन में हूती लड़ाकों की बढ़त से सऊदी अरब की चिंताएँ बढ़ गई हैं। रणनीतिक बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर हूतियों की पकड़ के दावों के बीच ईरान के आयतुल्लाह खामेनेई की पुरानी चेतावनी फिर चर्चा में है। जानिए इस संकट का ग्लोबल ट्रेड पर असर।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 12 September 2026, 4:16 PM IST

Riyadh: यमन के रणक्षेत्र से आ रही ताजा खबरों ने सिर्फ मध्य पूर्व की राजनीति को ही नहीं, बल्कि वैश्विक सामरिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने कभी दावा किया था कि सऊदी अरब को अमेरिका से मिलने वाले अत्याधुनिक हथियार एक दिन यमनी लड़ाकों के हाथों में होंगे।

आज जब यमन में सऊदी समर्थित बलों को पीछे हटना पड़ रहा है और सोशल मीडिया पर अमेरिकी हथियारों के साथ हूतियों के वीडियो सामने आ रहे हैं, तो खामेनेई के उस बयान की गूंज एक बार फिर पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।

बाब अल-मंदब: जहां अटका है दुनिया का व्यापार

यमन में हूती लड़ाकों ने पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी मोर्चों पर तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है। सबसे बड़ा संकट 'बाब अल-मंदब' जलडमरूमध्य को लेकर खड़ा हो गया है। यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया तथा यूरोप के बीच व्यापार का मुख्य राजमार्ग है।

यदि इस संकरे समुद्री रास्ते पर हूतियों का वर्चस्व पूरी तरह स्थापित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को अपना मार्ग बदलना पड़ेगा, जिससे ईंधन, समय और बीमा का खर्च अत्यधिक बढ़ जाएगा।

तेल की सप्लाई और ग्लोबल इकोनॉमी पर दबाव

हूतियों की बढ़ती ताकत का सीधा असर ऊर्जा बाजार और क्रूड ऑयल की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। मध्य पूर्व से होने वाली तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति के लिए यह समुद्री मार्ग जीवनरेखा माना जाता है।

यदि यहां सैन्य तनाव बढ़ता है या व्यापारिक जहाजों पर हमले तेज़ होते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम अचानक आसमान छू सकते हैं। इसका सीधा असर हजारों किलोमीटर दूर बैठे आम उपभोक्ताओं की जेब और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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दावों की आंधी में जमीनी हकीकत की तलाश

भले ही हूती समर्थकों द्वारा लगभग 4,600 किलोमीटर के विशाल क्षेत्र और पूरे लाल सागर पर कब्जे का दावा किया जा रहा हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

रणनीतिक इलाकों में हूतियों की मौजूदगी जरूर बढ़ी है, लेकिन पूरे समुद्री क्षेत्र पर उनका एकाधिकार साबित नहीं हुआ है। बहरहाल, सऊदी समर्थित ताकतों का पीछे हटना और अमेरिका-सऊदी रणनीतिक साझेदारी पर उठते सवाल इस बात का सबूत हैं कि यमन की जंग अब एक नया मोड़ ले चुकी है।

Location :  Riyadh

Published :  12 September 2026, 4:16 PM IST