विकासनगर-देहरादून के डाकपत्थर में यूजेवीएनएल सहित बिजली कर्मियों ने भूमि यूआईडीबी को स्थानांतरित करने और निजीकरण के विरोध में कार्य बहिष्कार कर रैली निकाली। कर्मचारियों ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 और नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 वापस लेने की चेतावनी दी।

भूमि हस्तांतरण और निजीकरण के विरोध में रैली
Dehradun: विकासनगर क्षेत्र के डाकपत्थर में बिजली कर्मियों ने यूजेवीएनएल की भूमि यूआईडीबी को स्थानांतरित किए जाने के शासनादेश के विरोध में जोरदार रैली और प्रदर्शन किया। उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, यमुना घाटी के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
मोर्चा के आह्वान पर यमुना घाटी अंतर्गत लखवाड़-व्यासी परियोजना, इछाड़ी डैम, छिबरो, खोदरी पावर हाउस, डाकपत्थर मुख्यालय, ढकरानी, ढालीपुर, कुल्हाल पावर हाउस, आसन बैराज, डाकपत्थर बैराज तथा जनपद अनुरक्षण कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों ने कार्य बंद कर धरना-प्रदर्शन किया। विभिन्न परियोजनाओं और कार्यालयों में मीटिंग आयोजित कर आगामी रणनीति पर चर्चा की गई।
मोर्चा पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पारित करने का प्रयास किया गया तो देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी बिना अतिरिक्त नोटिस के तत्काल ‘लाइटनिंग स्ट्राइक’ पर चले जाएंगे। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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कर्मचारियों ने यमुना परियोजना की भूमि यूआईडीबी को स्थानांतरित किए जाने के शासनादेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो पूर्व घोषित नोटिस के अनुसार हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। डाकपत्थर में सैकड़ों कर्मचारियों ने कॉलोनी क्षेत्र में विशाल जुलूस निकालते हुए “निजीकरण वापस लो” और “भूमि हस्तांतरण आदेश निरस्त करो” जैसे नारे लगाए।
यूजेवीएनएल कर्मचारियों की चेतावनी
मोर्चा ने पावर सेक्टर में बढ़ते निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 का विरोध किया। कर्मचारियों का कहना है कि वितरण, उत्पादन और ट्रांसमिशन में टीबीसीबी के माध्यम से निजीकरण आम उपभोक्ताओं, छोटे और मध्यम उद्योगों तथा गरीब वर्ग के हितों के खिलाफ है।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि नियमित प्रकृति के कार्यों में बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है। उन्होंने आउटसोर्सिंग पर रोक, नियमित पदों पर सीधी भर्ती, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग उठाई।
मोर्चा पदाधिकारियों के अनुसार, पहली बार संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी बिजली कर्मचारियों के समर्थन में आंदोलन में भागीदारी की। कर्मचारियों, इंजीनियरों, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त भागीदारी के कारण इस हड़ताल को ऐतिहासिक बताया जा रहा है।
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देहरादून मुख्यालय सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बिजली संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों ने कार्यालयों से बाहर निकलकर प्रदर्शन किया। यमुना घाटी में यह आंदोलन विशेष रूप से प्रभावी रहा, जहां बड़ी संख्या में कार्मिकों ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार को चेतावनी दी कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।