बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के विस्तार की संभावनाएं तेज हो गई हैं। रेलवे ने 31 हेक्टेयर भूमि पर स्वामित्व का दावा करते हुए आधुनिक स्टेशन, नई रेल लाइनों, प्लेटफार्म विस्तार और वंदे भारत सहित नई ट्रेनों के संचालन की योजना तैयार की है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हल्द्वानी में बढ़ेंगी रेल लाइनें और प्लेटफार्म
Nainital: बनभूलपुरा रेलवे भूमि प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के बहुप्रतीक्षित विस्तार को नई दिशा मिलती नजर आ रही है। रेलवे ने 31 हेक्टेयर भूमि पर अपने स्वामित्व का दावा करते हुए स्टेशन के आधुनिकीकरण, नई रेल लाइनों के निर्माण और वंदे भारत सहित अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की व्यापक योजना पेश की है। यदि भूमि विवाद सुलझता है, तो कुमाऊं क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव संभव है।
इज्जतनगर मंडल ने सर्वोच्च न्यायालय में स्पष्ट किया है कि भूमि उपलब्ध होते ही स्टेशन के आधुनिकीकरण का काम प्राथमिकता से शुरू किया जाएगा। वर्तमान में हल्द्वानी स्टेशन पर कुल आठ रेल लाइनें हैं, जिनमें पांच मुख्य और तीन सहायक लाइनें शामिल हैं। योजना के अनुसार करीब 17 नई लाइनों का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे विभिन्न दिशाओं की ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा।
इसके साथ ही स्टेशन के प्लेटफार्मों की संख्या तीन से बढ़ाकर छह करने की तैयारी है। प्लेटफार्म बढ़ने से यात्रियों को ट्रेन पकड़ने में आसानी होगी और भीड़भाड़ कम होगी। माल परिवहन के लिए अलग से गुड्स प्लेटफार्म बनाया जाएगा, जहां पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आवश्यक सामग्री लाने वाली मालगाड़ियां रुकेंगी।
रेलवे की योजना में गौला नदी के पास से गुजरने वाली मौजूदा रेल लाइन को सुरक्षित दिशा में शिफ्ट करने का प्रस्ताव शामिल है। बरसात के दौरान नदी के तेज बहाव से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिसे देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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गौला नदी के पास स्थित रेलवे फाटक पर अक्सर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए वहां अंडरपास बनाया जाएगा। इसके अलावा हाईवे की ओर से एक नई एंट्री विकसित की जाएगी, जिससे यात्री शहर में प्रवेश किए बिना सीधे नैनीताल दिशा की ओर जा सकेंगे। इससे हल्द्वानी शहर के ट्रैफिक जाम में कमी आने की उम्मीद है। रेलवे कोचों की धुलाई, सफाई और तकनीकी देख-रेख के लिए आधुनिक कोचिंग डिपो बनाने की भी योजना है, जिससे ट्रेनों के संचालन की गुणवत्ता और समयबद्धता बेहतर होगी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमित भूमि उपलब्ध होते ही वंदे भारत ट्रेन को कुमाऊं तक लाने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। इसे काठगोदाम से दिल्ली के बीच चलाने का प्रस्ताव है, जिससे क्षेत्र के यात्रियों को तेज और आधुनिक रेल सेवा मिल सकेगी। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के लिए प्रस्तावित नई ट्रेन सेवा भी इसी भूमि पर निर्भर है। इस ट्रेन के शुरू होने पर यात्री सीधे असम के कामाख्या मंदिर तक पहुंच सकेंगे। रेलवे मुंबई, वाराणसी और अन्य प्रमुख शहरों के लिए नई ट्रेनों की संभावना भी तलाश रहा है।
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वर्तमान में काठगोदाम और हल्द्वानी से मिलाकर केवल दस ट्रेनें संचालित होती हैं, जिससे यात्रियों को सीमित गंतव्यों तक ही सुविधा मिल पाती है। प्रस्तावित विस्तार के बाद ट्रेनों की संख्या और गंतव्य दोनों बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
रेलवे का मानना है कि भूमि विवाद सुलझने के बाद हल्द्वानी स्टेशन उत्तराखंड के प्रमुख आधुनिक रेलवे हब के रूप में विकसित हो सकता है, जो पर्यटन, व्यापार और स्थानीय यात्रियों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा।