रामनगर में एलपीजी सिलेंडर संकट के बीच पाइपलाइन गैस परियोजना अधर में अटकी है। 1000 से ज्यादा कनेक्शन के बावजूद सप्लाई शुरू नहीं हुई। DSU के लिए जमीन न मिलने से योजना रुकी है, जिससे लोग अभी भी सिलेंडर की मार झेल रहे हैं।

रामनगर में गैस संकट गहराया (Img- Google)
Ramnagar: उत्तराखंड के रामनगर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के कई इलाकों में लोग सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, जबकि बहुप्रतीक्षित पाइपलाइन गैस परियोजना अब भी अधर में लटकी हुई है।
करीब 14 से 15 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड गैस पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और 1000 से अधिक परिवारों को कनेक्शन भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद घरों तक गैस सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष गणेश रावत ने बताया कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए डिस्ट्रिक्ट सप्लाई यूनिट (DSU) की स्थापना जरूरी है। इसके लिए 1400 से 1500 वर्ग फीट जमीन की आवश्यकता है, लेकिन अब तक उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है।
इस मुद्दे पर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल से बातचीत की गई है। नगरपालिका या अन्य विभागों के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जमीन मिलते ही परियोजना तेजी से आगे बढ़ेगी।
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हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारी हिमांशु के अनुसार कंपनी की तकनीकी तैयारी पूरी है, लेकिन DSU के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाया है। जैसे ही जमीन उपलब्ध होगी, परियोजना का अगला चरण शुरू कर दिया जाएगा।
उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि यह परियोजना पहले से दो चरणों में चल रही है। पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि दूसरा चरण प्रगति पर है। जल्द ही संयुक्त निरीक्षण कर उपयुक्त भूमि का चयन किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिटिकुलेटेड एलपीजी सिस्टम एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों तक गैस पहुंचती है। इससे सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और स्टोरेज की समस्या खत्म हो जाती है और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलती है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जमीन उपलब्ध हो जाती, तो आज सैकड़ों परिवारों को सिलेंडर संकट का सामना नहीं करना पड़ता। फिलहाल परियोजना में देरी से लोगों की उम्मीदें अधर में लटकी हुई हैं।