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प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
Haldwani: देश के विभिन्न राज्यों में हो रही साइबर ठगी के तार जब नैनीताल जिले तक पहुंचे, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। साइबर अपराध के मामलों में ढिलाई बरतने पर अपर पुलिस महानिदेशक की कड़ी फटकार के बाद नैनीताल पुलिस ने महज एक ही रात में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 43 नए मुकदमे दर्ज कर डाले। इसके साथ ही जिले में इस तरह के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 49 पर पहुंच गई है।
बीते शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान साइबर अपराध के हॉटस्पॉट बने क्षेत्रों में कार्रवाई की सुस्त रफ्तार पर गहरी नाराजगी जताई गई थी। इसके तुरंत बाद आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती ने भी त्वरित एक्शन लेने के कड़े निर्देश दिए। उच्चाधिकारियों की इस सख्ती के बाद स्थानीय पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल के प्रतिबिंब मॉड्यूल और साइबर सेल से मिले इनपुट के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों की जांच तेज कर दी है।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में दर्ज साइबर ठगी के मामलों के तार सीधे हल्द्वानी और नैनीताल जिले के बैंक खातों से जुड़े हैं।
छत्तीसगढ़ कनेक्शन: छत्तीसगढ़ में दर्ज 26.78 लाख रुपये की ठगी से जुड़े मामले में मुखानी के एक एटीएम से 60 हजार रुपये निकाले गए।
पश्चिम बंगाल कनेक्शन: पश्चिम बंगाल में दर्ज 19.67 लाख रुपये की ठगी के मामले में हल्द्वानी स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम से 20 हजार रुपये की निकासी हुई।
तमिलनाडु कनेक्शन: तमिलनाडु में दर्ज 3.99 लाख रुपये की ठगी से जुड़े मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के एटीएम से 40 हजार रुपये निकाले जाने की पुष्टि हुई है।
हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र में केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक, कोटक बैंक, एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक के संदिग्ध खातों की गहन पड़ताल की जा रही है। मिसाल के तौर पर, पंजाब नेशनल बैंक में राजपुरा बस्ती निवासी शादाब के नाम से खुले एक खाते में 25 फरवरी से 27 जुलाई 2026 के बीच 3.39 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ, लेकिन जब पुलिस ने तस्दीक की तो खाताधारक के पते का कोई अता-पता नहीं मिला।
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इसी तरह मुखानी क्षेत्र में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 6 संदिग्ध खाते सामने आए हैं, जो नेम चंद्र शर्मा, रितिक आर्य, मनोज कुमार, महेंद्र चंद, संजीव कुमार और एक अज्ञात व्यक्ति से जुड़े हैं। इनमें से रितिक आर्य के खिलाफ 10 और संजीव कुमार के खिलाफ 6 एनसीआरपी शिकायतें पहले से दर्ज पाई गई हैं, जिसके बाद इन सभी छह खातों को तुरंत फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 5 खातों के साथ-साथ आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के खातों में भी संदिग्ध लेन-देन की बात सामने आई है।
पुलिस अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने और निकालने के लिए किस तरह किया गया। इन्हें 'म्यूल अकाउंट' (फर्जी या किराए के खाते) मानकर जांच की जा रही है कि खाताधारकों ने खुद अपनी मर्जी से ये खाते अपराधियों को सौंपे थे या फिर उनकी जानकारी के बिना ही उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। एडीजी ने साफ निर्देश दिए हैं कि इस लापरवाही में संलिप्त रहने वाले थाना और चौकी स्तर के अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की एक-एक कड़ी खंगाल रही है।
Location : Haldwani
Published : 18 October 2026, 3:42 PM IST