‘एक असाइनमेंट, कई तारीखें और नंबरों का विवाद’; कुमाऊं विश्वविद्यालय में अंकों को लेकर बड़ा बवाल

कुमाऊं विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग की छात्रा के असाइनमेंट और आंतरिक अंकों का मामला जांच के घेरे में है। छात्रहित में अंकतालिका संशोधित की गई है, जबकि प्रक्रियागत चूक की जांच के लिए समिति गठित की गई है। कुलपति प्रो. दीवान एस. रावत ने मामले को अपनी नियुक्ति से पहले का बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 31 August 2026, 5:27 PM IST

Nainital: कुमाऊं विश्वविद्यालय के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, भू-विज्ञान विभाग में छात्रा के असाइनमेंट जमा करने की अंतिम तारीख 25 फरवरी 2023 निर्धारित थी। इसी दिन छात्रा ने संबंधित शिक्षक को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजकर बताया था कि वह रामनगर में है। उसने 28 फरवरी को असाइनमेंट जमा करने की बात कही थी।

हालांकि, विश्वविद्यालय के अनुसार 28 फरवरी को असाइनमेंट जमा किए जाने का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके बाद 24 अप्रैल 2023 को छात्रा ने शिक्षक से दोबारा पूछा कि क्या वह असाइनमेंट जमा कर सकती है। इससे असाइनमेंट जमा होने की तारीख को लेकर सवाल खड़े हुए। विश्वविद्यालय का कहना है कि विभागीय रिकॉर्ड में यह भी स्पष्ट नहीं है कि असाइनमेंट वास्तव में किस तारीख को जमा किया गया था।

आंतरिक अंकों के रिकॉर्ड पर भी सवाल

मामले में छात्रा के आंतरिक अंकों को लेकर भी रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं। विश्वविद्यालय के मुताबिक, आरटीआई के जवाब में विभागाध्यक्ष की ओर से 24 अप्रैल 2023 को लॉगबुक में दर्ज जानकारी के आधार पर छात्रा के अंक भेजे जाने का उल्लेख किया गया। लेकिन विश्वविद्यालय की जांच में उपलब्ध उसी तारीख की लॉगबुक प्रविष्टि में अंकों को भेजे जाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला।

इससे रिकॉर्ड की स्थिति को लेकर सवाल उठे। इसके बाद 28 अप्रैल 2023 को विश्वविद्यालय ने सभी विभागों को पोर्टल पर अंक अपलोड करने के लिए तीन दिन का समय दिया था। बताया गया कि छात्रा के अंक इस दौरान पोर्टल पर अपडेट नहीं हुए।

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परिणाम जारी होने के बाद भी नहीं सुलझा मामला

विश्वविद्यालय ने 27 मई 2023 को एमएससी जियोलॉजी प्रथम सेमेस्टर का परिणाम जारी किया। इसके बाद भी छात्रा के असाइनमेंट और आंतरिक अंकों का मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका। आरटीआई में 15 जुलाई 2023 को विभाग की ओर से प्यून बुक की प्रविष्टि के आधार पर दोबारा अंक भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, विश्वविद्यालय के अनुसार निर्धारित समय के बाद असाइनमेंट स्वीकार करने और अंक भेजने के लिए परीक्षा नियंत्रक की अनुमति और विलंब शुल्क से जुड़ी प्रक्रिया होती है। इस मामले में ऐसी प्रक्रिया पूरी किए जाने का रिकॉर्ड विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराया गया।

2024 और 2025 में भी सामने आया मामला

विश्वविद्यालय के अनुसार, 5 अप्रैल 2024 को विभागाध्यक्ष की ओर से फिर से अंक भेजे जाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, संबंधित डायरी प्रविष्टि प्रश्नपत्र अनुभाग में भेजे जाने से जुड़ी बताई गई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह प्रविष्टि छात्रा के आंतरिक अंकों से संबंधित थी या नहीं।

इसके बाद  21 मई 2025  को छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक को पत्र देकर अपनी अंकतालिका में असाइनमेंट के अंक शामिल नहीं होने की शिकायत की। विश्वविद्यालय का कहना है कि विभागाध्यक्ष ने यह पत्र करीब नौ महीने बाद, 25 फरवरी 2026 को विश्वविद्यालय को भेजा। मामला परीक्षा समिति के सामने रखा गया, जहां छात्रा का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया।

जुलाई 2026 में कुलपति के सामने पहुंचा प्रकरण

13 जुलाई 2026 को छात्रा परीक्षा शाखा पहुंची और इसके बाद कुलपति से मुलाकात की। विश्वविद्यालय के मुताबिक, छात्रा से उसके दावे के समर्थन में दस्तावेज मांगे गए, लेकिन उसके पास संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद कुलपति ने छात्रहित को ध्यान में रखते हुए उप परीक्षा नियंत्रक को विभागाध्यक्ष से विस्तृत रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए। 14 जुलाई को रिपोर्ट मांगी गई और 23 जुलाई को विभागाध्यक्ष की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

छात्रहित में संशोधित की गई अंकतालिका

विश्वविद्यालय के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों और विभाग से प्राप्त अंकों के आधार पर 30 जुलाई 2026 को मामले का समाधान किया गया। छात्रहित को ध्यान में रखते हुए छात्रा की अंकतालिका में संशोधन किया गया। बाद में छात्रा को संशोधित मूल अंकतालिका और उपाधि भी मिल गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी प्रक्रियागत गलती को सही ठहराने के लिए नहीं, बल्कि छात्रा का भविष्य प्रभावित होने से बचाने के लिए लिया गया।

प्रक्रियागत चूक की होगी जांच

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि विभाग की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने को प्रशासनिक स्तर की चूक माना गया है। इसी की जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है। समिति यह पता लगाएगी कि असाइनमेंट जमा करने, आंतरिक अंक तैयार करने और उन्हें विश्वविद्यालय तक भेजने की प्रक्रिया में कहां लापरवाही हुई। साथ ही, रिकॉर्ड में अलग-अलग तारीखों पर सामने आई प्रविष्टियों की भी जांच की जाएगी।

कुलपति बोले- मेरी नियुक्ति से पहले का मामला

कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत ने कहा कि उन्होंने 21 जुलाई 2023 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था, जबकि इस मामले की शुरुआत फरवरी 2023 में हुई थी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध व्हाट्सऐप बातचीत से घटनाक्रम की तारीखों और संबंधित संवाद को समझने में मदद मिली।

कुलपति का आरोप है कि अब इस मामले को उनके निजी जीवन और चरित्र से जोड़कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने डिजिटल सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि उनकी तस्वीरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए तैयार या डिजिटल रूप से बदलकर इस्तेमाल किया गया।

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स्वतंत्र जांच की मांग

कुलपति के अनुसार, उन्हें 31 अगस्त को पद से रिलीव किया जा रहा है। उन्होंने राज्यपाल एवं कुलाधिपति से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का अनुरोध किया है।

उनका कहना है कि जांच से यह साफ होना चाहिए कि मामले में कौन-कौन लोग जिम्मेदार रहे और रिकॉर्ड तथा प्रक्रियाओं में चूक किस स्तर पर हुई। फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से छात्रहित में अंकतालिका संशोधित की जा चुकी है, जबकि प्रक्रियागत जिम्मेदारी तय करने की जांच जारी है।

Location :  Nainital

Published :  31 August 2026, 5:27 PM IST