द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे वृष लग्न में खोले जाएंगे। कपाट खुलने की घोषणा उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में की गई। बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे। चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति ने तैयारियां तेज कर दी हैं। देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

चारधाम यात्रा 2026 का शेड्यूल जारी (Image Source: Google)
Uttarakhand: देवभूमि उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 22 अप्रैल 2026 को प्रातः 08:00 बजे वृष लग्न में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने की तिथि की घोषणा शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विधि-विधान के साथ की गई। इस बार टी. गंगाधर लिंग को मुख्य पुजारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कपाट खुलने के साथ ही देशभर से बाबा केदार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
केदारनाथ मंदिर वर्ष में केवल छह महीने ही खुला रहता है। शीतकाल के दौरान भारी बर्फबारी के कारण दिवाली के बाद कपाट बंद कर दिए जाते हैं और बाबा की पूजा उखीमठ में होती है। मंदिर के कपाट बंद करते समय अंदर जलाया गया अखंड दीपक पूरे छह महीने तक जलता रहता है, जिसे विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि केदारनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के पृष्ठ भाग का प्रतीक है, जबकि नेपाल के पशुपतिनाथ में उनके अग्रभाग की पूजा होती है। मंदिर का संबंध पांडवों और आदि शंकराचार्य की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है।
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चारधाम यात्रा के क्रम में बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 6:15 बजे खोले जाएंगे। गाडू घड़ा यात्रा 7 अप्रैल से शुरू होगी, जो परंपरागत रूप से कपाट खुलने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा होती है। प्रशासन ने यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। मार्गों की मरम्मत, स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र और आवास सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलता है। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
मंदिर समिति और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी लेकर यात्रा की योजना बनाएं और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही यात्रा पर निकलें। सुरक्षा और सुविधा के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, हेल्थ चेकअप और ट्रैकिंग व्यवस्था भी लागू की जा रही है।
कपाट खुलने के साथ ही हिमालय की वादियों में फिर से "हर हर महादेव" के जयकारे गूंज उठेंगे और बाबा केदार के दरबार में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाएंगी।