केदारनाथ धाम का भीमबली–रामबाड़ा–गरुड़चट्टी पुराना मार्ग बनकर तैयार हो गया है। 2013 की आपदा में नष्ट हुआ यह रास्ता 2027 से शुरू होगा। दूरी 22 से घटकर 16 किमी हो जाएगी, हालांकि अभी स्वास्थ्य और बिजली जैसी सुविधाएं बहाल नहीं हैं।

केदारनाथ का पुराना मार्ग बनकर तैयार
Rudraprayag: केदारनाथ धाम तक पहुंचने वाला ऐतिहासिक भीमबली-रामबाड़ा-गरुड़चट्टी मार्ग एक बार फिर बनकर तैयार हो गया है। वर्ष 2013 की विनाशकारी आपदा में यह मार्ग पूरी तरह नष्ट हो गया था। करीब 12 साल बाद जिला प्रशासन ने इस पुराने मार्ग को दोबारा तैयार कर लिया है, जिससे केदारनाथ यात्रा को नया विकल्प मिलने जा रहा है।
इस पुराने मार्ग को फिर से बनाने में सरकार को करीब तीन साल का समय लगा। लंबे समय तक तकनीकी, भौगोलिक और सुरक्षा चुनौतियों के बीच काम चलता रहा। अब मार्ग का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, हालांकि अभी इस पर यात्रियों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।
फिलहाल केदारनाथ की पैदल यात्रा दूरी लगभग 22 किलोमीटर है। पुराने मार्ग के शुरू होने के बाद यह दूरी घटकर करीब 16 किलोमीटर रह जाएगी। इससे श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी और यात्रा कम समय व कम श्रम में पूरी की जा सकेगी। बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले यात्रियों के लिए यह मार्ग विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार, इस मार्ग से नियमित यात्रा वर्ष 2027 से शुरू की जाएगी। अभी प्रशासन इस मार्ग पर घोड़ा-खच्चर, डंडी-कंडी और अन्य व्यवस्थित सेवाओं की अनुमति नहीं देगा। हालांकि, जो यात्री अपनी इच्छा से पैदल इस मार्ग से जाना चाहें, उन पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई गई है।
2013 की आपदा के बाद फिर जीवित हुआ पुराना रास्ता
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मार्ग पर अभी कई जरूरी सुविधाएं पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई हैं। स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल रिलीफ पोस्ट (MRP), बिजली व्यवस्था, पेयजल, रोशनी और सुरक्षा मानकों को अभी विकसित किया जाना बाकी है। इन्हीं कमियों के चलते प्रशासन अभी इस मार्ग पर बड़े स्तर पर यात्रियों को भेजने से बच रहा है।
इन सुविधाओं को विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से शासन को करीब 6 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव के स्वीकृत होते ही स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सुरक्षा से जुड़े कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि बिना मूलभूत सुविधाओं के यात्रा शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है।
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जिला प्रशासन का कहना है कि जब तक स्वास्थ्य सेवाएं, विद्युत व्यवस्था और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक मार्ग पर नियंत्रित आवाजाही ही रहेगी। सभी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही घोड़ा-खच्चर और अन्य सेवाओं की अनुमति दी जाएगी, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।