रामनगर की काशीपुर रेंज के द्रोणासागर टीला क्षेत्र में वन विभाग ने देर रात पांचवें गुलदार को सुरक्षित रेस्क्यू किया। गुलदार को पिंजरे में कैद कर कॉर्बेट के ढेला रेस्क्यू सेंटर भेजा गया, जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।

द्रोणासागर टीले पर पांचवां गुलदार रेस्क्यू
Ramnagar: तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत काशीपुर रेंज से एक बार फिर राहत भरी खबर सामने आई है। द्रोणासागर टीला क्षेत्र में देर रात वन विभाग ने एक और गुलदार को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया है। यह इस क्षेत्र में अब तक पकड़ा गया पांचवां गुलदार है। लगातार गुलदारों की मौजूदगी से क्षेत्र में बने दहशत के माहौल के बीच इस रेस्क्यू को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
काशीपुर रेंज के रेंज अधिकारी देवेंद्र सिंह राजवार ने जानकारी देते हुए बताया कि द्रोणासागर टीला क्षेत्र में इससे पहले चार गुलदारों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि देर रात लगाए गए पिंजरे में यह गुलदार कैद हो गया, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली।
रेंज अधिकारी के अनुसार द्रोणासागर टीला क्षेत्र घने जंगल से सटा हुआ है, जिस कारण यहां गुलदारों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। जंगल से सटे होने के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों में गुलदार देखे जाने की सूचनाएं अक्सर मिलती रहती हैं। इसी वजह से वन विभाग लगातार सतर्कता बरत रहा है।
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रेस्क्यू किए गए गुलदार को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा जा रहा है। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि गुलदार और स्थानीय लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कैद कर ढेला भेजा गया गुलदार
गुलदार की लगातार मौजूदगी के चलते द्रोणासागर टीला क्षेत्र, किले में कार्यरत कर्मचारियों और आसपास के रिहायशी इलाकों में लंबे समय से भय का माहौल बना हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार गुलदार को खुले में घूमते देखा गया, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया था।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद वन विभाग ने इलाके में पिंजरे लगाने और नियमित गश्त की रणनीति अपनाई। सतर्क निगरानी और योजनाबद्ध कार्रवाई के चलते एक के बाद एक गुलदारों को सुरक्षित रूप से पकड़ने में सफलता मिली है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस पूरे अभियान में अहम भूमिका निभाई।
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वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में निगरानी आगे भी जारी रहेगी। उद्देश्य यही है कि भविष्य में किसी भी तरह की मानव–वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो और स्थानीय लोगों की सुरक्षा बनी रहे। विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि गुलदार दिखने की स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें और खुद जोखिम न लें।