
बंगाल चुनाव विश्लेषण(Source: Google)
New Delhi: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो अपनी कल्याणकारी योजनाओं और जुझारू तेवरों के लिए जानी जाती हैं, इस बार सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) को रोकने में विफल रहीं। नतीजों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधार को हिला कर रख दिया है।
ममता बनर्जी इस चुनाव में कई मोर्चों पर घिरी नजर आईं। शिक्षक भर्ती घोटाला और पार्टी के शीर्ष सहयोगियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने जनता के बीच नकारात्मक संदेश भेजा। वहीं, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष के तीखे हमलों ने तृणमूल के उस महिला वोट बैंक में सेंध लगाई, जो कभी उनकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था। 2021 में जो 'बंगाली अस्मिता' का कार्ड चला था, वह इस बार भ्रष्टाचार के आरोपों के आगे फीका पड़ गया।
ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने (SIR - Standard Information Retreival/Voter Deletion) के मुद्दे को एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश की। उन्होंने इसे केंद्र और चुनाव आयोग की साजिश करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि जिन 20 सीटों पर सबसे ज्यादा नाम कटे, उनमें से 13 पर टीएमसी ने जीत दर्ज की। इससे यह संकेत मिलता है कि SIR का मुद्दा वोटरों को टीएमसी के पक्ष में लामबंद करने के बजाय बेअसर साबित हुआ।
चुनाव से ठीक पहले ममता सरकार ने 'युवा साथी योजना' के जरिए बेरोजगारों को 1,500 रुपये और 'लक्ष्मी भंडार' की राशि बढ़ाकर 1,500 रुपये करने का बड़ा दांव खेला था। 81 लाख से अधिक युवाओं के पंजीकरण के बावजूद, मतदान के समय यह योजनाएं टीएमसी के लिए 'गेमचेंजर' साबित नहीं हो सकीं। वोटरों ने आर्थिक लाभ के बजाय शासन (Governance) और सुधार को प्राथमिकता दी।
इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर ममता बनर्जी की अपने ही गढ़ भवानीपुर से हार रही। 207 सीटों के साथ भाजपा ने बंगाल में बहुमत हासिल किया है। इस हार ने न केवल ममता के सबसे लंबे समय तक महिला मुख्यमंत्री बनने के सपने को तोड़ दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन में उनकी मोलभाव करने की शक्ति को भी कमजोर कर दिया है।
इतनी करारी हार के बावजूद टीएमसी के लिए राहत की बात यह है कि पार्टी का वोट शेयर 40% से ऊपर बना हुआ है। 71 वर्षीय ममता बनर्जी ने हार स्वीकार करने और इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, जिससे यह साफ है कि वह एक बार फिर सड़कों पर उतरकर संघर्ष की राजनीति शुरू करने के मूड में हैं।
Location : New Delhi
Published : 6 May 2026, 5:51 AM IST
Topics : bjp Election Analysis Mamata Banerjee West Bengal