हमीरपुर जिले में रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहा। गैस एजेंसी के बाहर सुबह से ही भीड़ जुट रही है, लेकिन वितरण में देरी और अव्यवस्था से लोग परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि कई परिवारों को चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है।

हमीरपुर में सिलेंडर के लिए हाहाकार
Hamirpur: भूख, लाचारी और इंतजार… ये तस्वीरें किसी हादसे की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जंग लड़ते आम लोगों की हैं। यूपी के हमीरपुर में हालात ऐसे हो गए हैं कि गैस सिलेंडर भी अब “नंबर आने” का इंतजार कर रहा है। यहां इंसान ही नहीं, बल्कि खाली सिलेंडर भी लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं- जैसे अपनी बारी का हिसाब मांग रहे हों।
सुबह से शाम तक इंतजार, फिर भी खाली हाथ
हमीरपुर जिले में रसोई गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। लोग सुबह सात बजे से ही गैस एजेंसी के बाहर पहुंचकर लाइन में लग जाते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद कई बार उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाता। कुछ खुशकिस्मत लोगों को गैस मिल जाती है, जबकि बाकी को मायूस होकर अगले दिन फिर से लाइन में लगने की मजबूरी झेलनी पड़ती है।
सुसाइड नोट का सच: आखिर क्यों बढ़ रहे हैं अकेलेपन के केस? एक महिला की कहानी से खुला बड़ा सवाल
तस्वीरें बता रहीं हकीकत, दावों की खुली पोल
इन हालातों की तस्वीरें सरकारी दावों की सच्चाई उजागर कर रही हैं। एक तरफ पर्याप्त गैस सप्लाई के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एजेंसी के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ और लाइन में लगे खाली सिलेंडर अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। लोगों को बस इतना पता है कि अगर एक सिलेंडर मिल जाए, तो उनके घर का चूल्हा जल सकेगा।
माधुपिया गैस एजेंसी पर अव्यवस्था का आरोप
मौदहा कोतवाली क्षेत्र स्थित माधुपिया गैस एजेंसी वितरण केंद्र पर हालात और भी खराब नजर आए। यहां सुबह से ही सैकड़ों लोग लाइन में खड़े थे, लेकिन दोपहर तक गैस वितरण शुरू नहीं हो सका। तेज धूप से बचने के लिए कई लोग अपने सिलेंडर लाइन में लगाकर खुद छांव में बैठकर इंतजार करते दिखे।
शादीशुदा मर्द का लिव-इन रिश्ता अपराध नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़ें पूरा मामला
कई दिनों से भटक रहे लोग, चूल्हे का सहारा
ग्राहकों का कहना है कि वे कई दिनों से गैस सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। कभी बुकिंग में दिक्कत बताई जाती है, तो कभी सिलेंडर खत्म होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। हालात इतने खराब हैं कि कई परिवारों को अब चूल्हा या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।