‘नम आंखें और भारी मन से मां को अंतिम विदाई’, सुलतानपुर में गोमती नदी के सीताकुंड घाट पर प्रतिमा विसर्जन

सुलतानपुर में ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव के समापन पर बुधवार को गोमती नदी के सीताकुंड घाट पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया। करीब 36 घंटे से जारी शोभायात्रा में नगर की लगभग 250 प्रतिमाएं शामिल रहीं। जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, वहीं मां की विदाई के वक्त श्रद्धालुओं की आंखें नम नजर आईं।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 28 October 2026, 1:24 PM IST
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Sultanpur: सुलतानपुर में ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव के समापन पर माहौल भक्तिमय होने के साथ भावुक भी हो गया। करीब 36 घंटे से जारी भव्य विसर्जन शोभायात्रा के बीच बुधवार सुबह से गोमती नदी के सीताकुंड घाट पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हुआ। नगर क्षेत्र की करीब 250 प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रक्रिया देर शाम तक पूरी होने की उम्मीद है। मां की विदाई के समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और उत्साह दिखाई दिया, तो वहीं कई भक्तों की आंखें नम हो गईं। ढोल-नगाड़ों, देवी गीतों और जयकारों के बीच सुलतानपुर की करीब 68 साल पुरानी दुर्गा पूजा परंपरा अपने समापन की ओर बढ़ रही है।

ठठेरी बाजार से निकली भव्य शोभायात्रा

सुलतानपुर की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा की भव्यता एक बार फिर देखने को मिली। सोमवार देर शाम नगर के ठठेरी बाजार में बड़ी दुर्गा माता की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह और पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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नगर क्षेत्र की करीब 250 दुर्गा प्रतिमाओं की इस शोभायात्रा में श्रद्धा, आस्था और उल्लास का संगम दिखाई दिया। करीब पांच किलोमीटर लंबे शोभायात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा का पूजन-अर्चन किया और प्रतिमाओं का स्वागत किया। पूरी यात्रा के दौरान देवी गीतों और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।

आकर्षक झांकियों ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान

शोभायात्रा में आधुनिक विद्युत सज्जा से सजी झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। प्रयागराज, मथुरा और दिल्ली से आए कलाकारों की स्वचालित झांकियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

रावण वध, शिव तांडव और काली तांडव की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बैंड-बाजे और डीजे पर बजते देवी गीतों की धुन पर युवा श्रद्धालु नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। पूजा समितियों की ओर से जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भव्य सजावट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और धार्मिक उत्साह ने शोभायात्रा को खास बना दिया।

सीताकुंड घाट पर शुरू हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन

करीब 36 घंटे तक चली शोभायात्रा के बाद बुधवार सुबह गोमती नदी के सीताकुंड घाट पर प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला तेज हुआ। नगर क्षेत्र की करीब 250 प्रतिमाओं के साथ ग्रामीण इलाकों से लाई गई प्रतिमाओं का विसर्जन भी जारी रहा।

सीताकुंड घाट पर गोमती नदी में नम आंखों से हो रहा प्रतिमा विसर्जन (Img: Dynamite News)

विसर्जन स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मां दुर्गा की अंतिम पूजा-अर्चना की और अगले वर्ष फिर से आगमन की कामना के साथ उन्हें विदाई दी। इस दौरान जहां ढोल-नगाड़ों और जयकारों की गूंज सुनाई दी, वहीं मां की विदाई के क्षण में कई श्रद्धालु भावुक भी नजर आए।

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प्रतिमाओं को व्यवस्थित तरीके से विसर्जन स्थल तक पहुंचाने के लिए केंद्रीय पूजा समिति के कार्यकर्ता लगातार सक्रिय रहे। चौक क्षेत्र में प्रतिमाओं को नंबर देकर निर्धारित क्रम में आगे बढ़ाया गया, ताकि शोभायात्रा और विसर्जन की व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

करीब 68 साल पुरानी है दुर्गा पूजा की परंपरा

सुलतानपुर में दुर्गा पूजा महोत्सव की परंपरा करीब 68 साल पुरानी बताई जाती है। यहां नवरात्र की सप्तमी से शुरू होने वाले महोत्सव का समापन शरद पूर्णिमा के अवसर पर होता है। इस दौरान श्रद्धालु करीब एक पखवाड़े तक मां दुर्गा की आराधना में जुटे रहते हैं।

महोत्सव के संस्थापक परिवार से जुड़ी रचना अग्रवाल ने कहा कि यहां दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और भावनाओं से जुड़ा उत्सव है। लंबे समय तक पूजा-अर्चना करने के बाद जब मां की प्रतिमाओं को विदाई दी जाती है, तो यह पल भक्तों के लिए बेहद भावुक हो जाता है।

मां की विदाई पर भावुक हुए श्रद्धालु

सीमा बरनवाल ने कहा कि मां दुर्गा की विदाई के समय मन व्यथित हो जाता है। इतने दिनों तक पूजा-अर्चना करने के बाद मां को विदा करना भावुक कर देने वाला क्षण होता है। शिवानी पांडे ने भी विदाई के दौरान उमड़ने वाली भावनाओं का जिक्र किया। उनके अनुसार, प्रतिमाओं के स्वरूप और पूरे माहौल में विदाई की भावुकता साफ दिखाई दे रही थी। वहीं, स्नेहलता अग्रवाल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि मां दुर्गा ने भक्तों की पूजा स्वीकार की है। मां की विदाई के साथ ही श्रद्धालु अगले वर्ष उनके फिर से आगमन की प्रतीक्षा करने लगते हैं।

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विसर्जन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। स्थानीय पुलिस बल के साथ आठ जिलों से आए पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था में दो अपर पुलिस अधीक्षक, आठ क्षेत्राधिकारी, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और बड़ी संख्या में आरक्षी लगाए गए हैं।

इसके अलावा जल पुलिस, पीएसी के गोताखोर, बम निरोधक दस्ता और ब्लैक कैट्स कमांडो भी तैनात किए गए हैं। विसर्जन स्थल पर प्रतिमाओं की आवाजाही और श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।आस्था, परंपरा और भावनाओं के इस संगम के बीच सुलतानपुर का ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। मां दुर्गा को विदाई देते समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हैं, लेकिन उनके मन में अगले साल मां के फिर से आगमन की उम्मीद और उत्साह भी है।

Location :  Sultanpur

Published :  28 October 2026, 1:24 PM IST

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