संगम नगरी से विंध्याचल और चित्रकूट तक दौड़ेगी मेट्रो? प्रयागराज के भविष्य के ट्रांसपोर्ट प्लान की बड़ी सिफारिश

उत्तर मध्य रेलवे की एक रिपोर्ट में प्रयागराज की भविष्य की परिवहन जरूरतों और वर्ष 2047 तक आबादी में डेढ़ गुना वृद्धि को देखते हुए मेट्रो नेटवर्क को विंध्याचल और चित्रकूट तक विस्तार करने की सिफारिश की गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 October 2026, 2:23 PM IST

Prayagraj: नदियों के संगम पर बसे शहर प्रयागराज में आने वाले सालों में परिवहन व्यवस्था को बदलने की योजना पर काम चल रहा है। शहर की बढ़ती आबादी और कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजनों के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए यह सुझाव दिया गया है कि प्रयागराज से विंध्याचल और चित्रकूट तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जाए। इसके अलावा वाराणसी, लखनऊ और कानपुर के साथ कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए एक इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव भी है। हालांकि, अभी यह केवल एक सुझाव है और इसे सरकार से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।

विंध्याचल और चित्रकूट तक मेट्रो विस्तार का प्रस्ताव

मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज की भविष्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक 'मल्टी-मॉडल' परिवहन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया है। इसमें शहर के मेट्रो नेटवर्क को विंध्याचल और चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है।

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इस प्रस्ताव का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान तीर्थयात्रियों की आवाजाही को आसान बनाना है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है, तो प्रयागराज आने वाले लोगों को पास के तीर्थ स्थलों तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक अतिरिक्त विकल्प मिल जाएगा। हालांकि, मेट्रो विस्तार के लिए अभी तक कोई निश्चित रूट, लागत या निर्माण की समय-सीमा तय नहीं की गई है।

2047 तक शहर की 1.5 गुना हो सकती है आबादी

रिपोर्ट में एक ऐसी परिवहन योजना की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जो 2047 तक प्रयागराज के संभावित शहरी विस्तार को ध्यान में रखे। अनुमानों के अनुसार, अगले दो दशकों में शहर की आबादी मौजूदा संख्या से लगभग 1.5 गुना तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही शहर का शहरी दायरा भी अपने केंद्र से 25-30 किलोमीटर तक फैलने की उम्मीद है।

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ऐसे हालात में केवल सड़कों को चौड़ा करने से ट्रैफिक से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। इसलिए, मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) सहित परिवहन के विभिन्न साधनों को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। इसका उद्देश्य रोजाना सफर करने वालों के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों के लिए शहर आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।

वाराणसी, लखनऊ और कानपुर के साथ कनेक्टिविटी पर जोर

इस प्रस्ताव में प्रयागराज को वाराणसी, लखनऊ और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले मार्गों पर एक बेहतर परिवहन प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए सड़क और रेल कॉरिडोर की जरूरतों का आकलन करने के वास्ते एक 'ओरिजिन-डेस्टिनेशन' सर्वेक्षण कराने की सिफारिश की गई है।

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यह सर्वेक्षण यात्रियों के यात्रा पैटर्न को समझने में मदद करेगा जैसे कि लोग कहां से कहां तक यात्रा करते हैं, किन मार्गों पर सबसे अधिक दबाव रहता है और कहां परिवहन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है। इस तरह की जानकारी बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ और ट्रैफिक जाम के प्रबंधन की योजना बनाने में भी उपयोगी होगी।

फाफामऊ, झूंसी, नैनी और बमरौली को जोड़ने का खाका

प्रयागराज के भीतर सार्वजनिक परिवहन के दायरे को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इस प्रस्ताव में फाफामऊ, झूंसी, नैनी और बमरौली जैसे उपनगरीय इलाकों को मेट्रो प्रणाली या रीजनल रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क के जरिए मुख्य शहर से जोड़ने की परिकल्पना की गई है।

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इससे शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच आना-जाना आसान हो जाएगा और रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों तथा अन्य परिवहन केंद्रों तक पहुंच बेहतर होगी। हालांकि, इन इलाकों को जोड़ने के लिए किस तरह के परिवहन साधन का उपयोग किया जाएगा और सटीक मार्ग क्या होंगे, यह भविष्य के सर्वेक्षणों और विस्तृत योजना के आधार पर तय किया जाएगा।

प्रयागराज मेट्रो के लिए दो कॉरिडोर का प्रस्ताव

प्रयागराज में शहरी मेट्रो नेटवर्क के लिए एक अलग परियोजना पर भी काम चल रहा है। संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में दो कॉरिडोर का प्रस्ताव है एक शांतिपुरम से छिवकी तक, और दूसरा झूंसी से हवाई अड्डे तक। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपये है। इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होगी।

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क्या जल्द ही मेट्रो का काम शुरू होगा?

प्रयागराज से विंध्याचल और चित्रकूट तक मेट्रो कनेक्टिविटी बढ़ाने की सिफारिश को अभी एक स्वीकृत परियोजना नहीं माना जा सकता है। इसे आगे बढ़ाने के लिए कई चरणों को पूरा करना होगा, जिसमें विस्तृत सर्वेक्षण करना, तकनीकी और वित्तीय आकलन करना, संबंधित एजेंसियों से सहमति लेना और सरकारी मंजूरी प्राप्त करना शामिल है। अगर भविष्य में इस क्षेत्रीय परिवहन योजना को मंजूरी मिल जाती है, तो प्रयागराज और आस-पास के धार्मिक स्थलों के बीच यात्रा के विकल्प बढ़ सकते हैं। फिलहाल शहर के निवासियों और तीर्थयात्रियों को इस प्रस्ताव पर आधिकारिक फैसले का इंतजार करना होगा।

Location :  Prayagraj

Published :  25 October 2026, 2:23 PM IST