
मिर्जापुर में डिग्री कॉलेज शिक्षकों का हुंकार (Img: Dynamite News)
Mirzapur: मिर्जापुर के 'डिस्ट्रिक्ट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन' ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को उजागर करने और रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ. राजमोहन शर्मा के नेतृत्व में शिक्षक जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित 31 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कुछ शिक्षकों ने अपनी बांह पर काली पट्टी बांधी थी।
एसोसिएशन की मुख्य मांग यह है कि सहायता प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) का लाभ दिया जाए ठीक उसी तरह जैसा कि संसद सदस्यों, विधानसभा सदस्यों और न्यायपालिका के सदस्यों को मिलता है। इसके अलावा उन्होंने मांग की है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए। मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार जैसे राज्यों, तथा केंद्र सरकार के कुछ शैक्षणिक संस्थानों में रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष होने का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इसी तरह की नीति अपनाने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में यह मांग भी शामिल है कि सहायता प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के बराबर मेडिकल लीव दी जाए। एसोसिएशन ने जटिल ट्रांसफर प्रक्रिया को सरल बनाने, एक साल की अनिवार्य सेवा की शर्त को हटाने और ऑनलाइन ट्रांसफर सुविधा शुरू करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने रोस्टर प्रणाली से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने का भी अनुरोध किया है।
डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा 31 सूत्रीय ज्ञापन (Img: Dynamite News)
शिक्षक संघ ने पहले घोषित किए गए PhD इंक्रीमेंट को तुरंत लागू करने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार, इस इंक्रीमेंट की घोषणा पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री ने की थी। उन्होंने यह भी मांग की है कि पात्रता की तारीख से ही 'प्रोफेसर' का पदनाम दिया जाए और कॉलेजों में काम कर रहे शिक्षकों को 'सीनियर प्रोफेसर' का पदनाम भी दिया जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि जिन शिक्षकों ने 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) को चुना है, उनके 'राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली' (NPS) खातों में जमा राशि को तुरंत उनके 'सामान्य भविष्य निधि' (GPF) खातों में स्थानांतरित किया जाए। इसके अलावा इसमें यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों को 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने पर उनसे जुड़ी सभी सेवानिवृत्ति देय राशियां समय पर मिलें।
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संगठन ने 'शिक्षक श्री' और 'सरस्वती' पुरस्कारों को फिर से शुरू करने की मांग की है, जो पहले उच्च शिक्षा क्षेत्र के शिक्षकों को दिए जाते थे। साथ ही, ज्ञापन में यह भी अनुरोध किया गया है कि सहायता प्राप्त कॉलेजों में काम करने वाले दिव्यांग शिक्षकों को 'परिवहन भत्ता' दिया जाए, ताकि उन्हें अपने संस्थान आने-जाने में आसानी हो यह सुविधा वर्तमान में राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलती है।
कलेक्ट्रेट परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए, संगठन के जिला अध्यक्ष डॉ. राजमोहन शर्मा ने बताया कि शिक्षक 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) को बहाल करने और अन्य कई मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया है। डॉ. शर्मा ने बताया कि संगठन की मुख्य मांगों में 'पुरानी पेंशन योजना' को फिर से लागू करना और उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करना शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि संगठन ने इस ज्ञापन में कुल 31 मांगें रखी हैं।
Location : Mirzapur
Published : 5 November 2026, 6:30 PM IST