
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में पुलिस का बड़ा एक्शन (Img: Pinterest)
Ayodhya: बुधवार को पुलिस ने राम मंदिर डोनेशन फंड मामले में एंटी-करप्शन कोर्ट में 36,039 पेज की चार्जशीट दाखिल की। खास बात यह है कि चंपत राय (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव), ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और कंस्ट्रक्शन इंचार्ज गोपाल राव को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है; बल्कि पुलिस ने उन्हें गवाह के तौर पर शामिल किया है।
चार्जशीट में कुल 133 गवाहों के नाम हैं। इसके अलावा, कोर्ट में 59 पेज का औपचारिक चार्ज डॉक्यूमेंट और केस डायरी की 101 एंट्रीज भी जमा की गईं।
पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट का आकार चर्चा का विषय बन गया। लगभग 36,000 पेज के डॉक्यूमेंट्स को चार बक्सों और दो कार्टन में कोर्ट तक लाया गया। इसे दाखिल करने के बाद कोर्ट ने डॉक्यूमेंट्स की जांच की प्रक्रिया शुरू की। इसके दाखिल होने की खबर से कोर्ट परिसर में हलचल मच गई।
कुछ वकीलों ने जांच प्रक्रिया और कुछ लोगों को आरोपी न बनाने के फैसले पर आपत्ति जताई। एंटी-करप्शन कोर्ट के बाहर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी हुई जिससे थोड़ी देर के लिए हंगामा हुआ।
यह भी पढ़ें - Ayodhya: ट्रस्ट के CEO पर उठे सवालों का पलटवार, पूर्व IPS की सफाई और चयन प्रक्रिया के आधिकारिक रिकॉर्ड ने किए सारे संशय दूर
हालांकि, संभावित अशांति को देखते हुए कोर्ट परिसर में पहले से ही पुलिसकर्मी और प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) के जवान तैनात किए गए थे। चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया के दौरान जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी के साथ SP (सिटी) चक्रपाणि त्रिपाठी, CO (सिटी) श्रियाश त्रिपाठी, स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) मनोज शर्मा और राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सुमित श्रीवास्तव मौजूद थे।
कोर्ट ने इस मामले में लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर भी सुनवाई की। जांच में दखल देने की मांग करने वाले वकीलों द्वारा जमा किए गए हलफनामों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। इस मामले में रिमांड को लेकर अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है।
यह भी पढ़ें - Ayodhya: कथावाचक देवेंद्र पाठक पर पत्नी जया के गंभीर आरोप, फिर संत समाज ने क्यों बनाई दूरी?
4 जून: गिनती वाले कमरे में कैश छिपाने की घटना सामने आई।
10 जून: जांच की मांग के बाद एक रिपोर्ट मांगी गई।
13 जून: पहली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई।
15 जून: SIT ने चंपत राय और गोपाल राव समेत कई कर्मचारियों से पूछताछ की।
16 जून: ट्रस्ट के लगभग 11 महीनों के कामकाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई।
17 जून: बैंक अधिकारियों और करेंसी-गिनने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई।
18 जून: डॉ. अनिल मिश्रा और अन्य लोगों से जानकारी जुटाई गई।
19 जून: चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की गई।
23 जून: SIT ने गृह विभाग को शुरुआती रिपोर्ट सौंपी।
25 जून: राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
26 जून: FIR दर्ज होने के बाद सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के मुताबिक जांच CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ी।
Location : Ayodhya
Published : 24 September 2026, 11:20 AM IST