बलिया में नर्सिंग होम में इलाज के दौरान युवती की मौत के बाद मामला गरमा गया है।पुलिस द्वारा हत्या की धारा में केस दर्ज करने पर डॉक्टरों ने कड़ी आपत्ति जताई।चिकित्सकों ने प्रेस वार्ता कर निष्पक्ष मेडिकल जांच और कार्रवाई पर रोक की मांग की। चिकित्सक समुदाय ने चेतावनी दी कि यदि इलाज के दौरान हुई मौत को हत्या मानकर डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी।

चिकित्सकों ने की प्रेस वार्ता
Ballia: एक निजी नर्सिंग होम में उपचार के दौरान युवती अनीषा पाण्डेय की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण में पुलिस द्वारा हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में गुरुवार को चिकित्सकों ने प्रेस वार्ता कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रेस वार्ता में उपस्थित डॉक्टरों ने मृतका के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि किसी मरीज की मृत्यु डॉक्टर के लिए भी अत्यंत पीड़ादायक और व्यक्तिगत क्षति का क्षण होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी को बचाना नहीं, बल्कि न्याय और सत्य की मांग करना है।
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चिकित्सकों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि डॉक्टर जीवन बचाने की शपथ लेकर काम करता है। उसे सीधे हत्यारा मान लेना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जटिलताएं आना चिकित्सा प्रक्रिया का हिस्सा होता है। यदि सर्जरी के दौरान मरीज की स्थिति को देखते हुए ओपन सर्जरी का निर्णय लिया गया। वह मरीज की जान बचाने के लिए लिया गया चिकित्सकीय निर्णय था, न कि कोई आपराधिक मंशा।
डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी विशेषज्ञ मेडिकल जांच या तकनीकी राय के सीधे हत्या की धारा लगा दी। यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत है। उन्होंने जैकब मैथ्यू मामले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप तय करने से पहले मेडिकल बोर्ड की राय लेना आवश्यक है।
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चिकित्सक ने चेतावनी दी कि इलाज के दौरान हुई मौत को हत्या मानकर डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में डॉक्टर गंभीर मरीजों का इलाज करने से कतराएंगे। जिससे आम जनता को नुकसान होगा। चिकित्सकों ने कहा कि वे पीड़ित परिवार के साथ हैं और चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए लेकिन यह प्रक्रिया कानून और वैज्ञानिक आधार पर ही होनी चाहिए।