कहां छिपा है 4000 किलो सोना? सदियों बाद भी नहीं मिला खजाना, UP के इस किले का सच उड़ा देगा होश!

सोनभद्र में स्थित अगोरी किला सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि सदियों पुराने रहस्यों का जीवंत प्रतीक माना जाता है। घने जंगलों और रिहंद, सोन व बिजुल नदियों से घिरा यह किला आज भी अपने भीतर छिपे कथित गुप्त खजाने को लेकर चर्चा में बना हुआ है।

Updated : 29 May 2026, 8:10 PM IST

Sonbhadra Agori Fort:  उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में स्थित अगोरी किला सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि सदियों पुराने रहस्यों का जीवंत प्रतीक माना जाता है। घने जंगलों और रिहंद, सोन व बिजुल नदियों से घिरा यह किला आज भी अपने भीतर छिपे कथित गुप्त खजाने को लेकर चर्चा में बना हुआ है। कहा जाता है कि 12वीं शताब्दी में चंदेल राजपूतों ने खैरवारों को पराजित कर इस किले की स्थापना की थी। राजा भ्रम जित और उनके पुत्र परीमल ने इसे 400 गांवों के समृद्ध केंद्र के रूप में विकसित किया, जहां मुगल काल तक भारी राजस्व जमा होता था।

आध्यात्मिक आस्था का केंद्र

आज यह किला अघोरी साधुओं और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां स्थित मां दुर्गा की प्राचीन प्रतिमा दूर-दूर से आने वाले भक्तों को आकर्षित करती है। लेकिन किले की सबसे बड़ी पहचान उसकी गुप्त सुरंगों, रहस्यमयी गलियों और खजाने से जुड़ी कहानियां हैं, जो आज भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती हैं।

4000 किलो सोना पनारी जंगल में कहीं छिपा

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, वर्ष 711 ईस्वी में आदिवासी राजा बाल शाह ने चंदेलों से अपने खजाने को बचाने के लिए लगभग 4000 किलो सोना पनारी जंगल में कहीं छिपा दिया था, जो किले से करीब 7 किलोमीटर दूर बताया जाता है। ‘सौ मन सोना’ की यह कहानी आज भी इलाके में प्रचलित है। कहा जाता है कि बाद में राजा बाल शाह जंगली जानवरों का शिकार हो गए, जबकि उनकी पत्नी जुराही की हत्या कर दी गई। जुगैल गांव में आज भी उनके नाम से जुड़ा मंदिर मौजूद होने की बात कही जाती है।

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गुफा से राजा की तलवार और कवच भी मिले

खजाने की तलाश में कई लोगों ने वर्षों तक किले और आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन की। स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक गुफा से राजा की तलवार और कवच भी मिले थे, लेकिन सोने का रहस्य आज तक अनसुलझा बना हुआ है। हालांकि, खजाने की खोज के दौरान किले को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी सामने आईं।

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अगोरी किले को नई पहचान

अब इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में यहां 1616 ईस्वी का फारसी शिलालेख और वीर लोरिक की गाथा से जुड़ा हाथी के आकार का विशाल पत्थर मिलने से इसकी ऐतिहासिक अहमियत और बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग जल्द ही ‘रहस्यमयी किला साहसिक यात्रा’ शुरू करने की योजना बना रहा है, जिसमें गाइडेड टूर, लोककथाओं का मंचन और रोमांचक गतिविधियां शामिल होंगी। इससे न सिर्फ अगोरी किले को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।

Location :  Sonbhadra

Published :  29 May 2026, 8:08 PM IST