UP Police Bharti: आरक्षण विवाद में अभ्यर्थियों की बड़ी जीत, हाईकोर्ट ने खारिज कीं ये 4 अपीलें

उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018 के आरक्षण विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की चार विशेष अपीलें खारिज कर दी हैं। फैसले से सैकड़ों अभ्यर्थियों के चयन का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, सफल अभ्यर्थियों को पिछली तारीख से वेतन और वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलेगा।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 29 October 2026, 5:53 AM IST

Prayagraj: उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018 में आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की चार विशेष अपीलें खारिज कर दी हैं। इस फैसले से उन सैकड़ों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद चयन से बाहर रह गए थे। अब इन अभ्यर्थियों के चयन का रास्ता साफ हो गया है।

न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि सफल याचिकाकर्ताओं को वित्तीय लाभ उनकी नियुक्ति की तारीख से ही मिलेगा। उन्हें पिछली तारीख से वेतन या वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जाएगा।

2018 में निकली थी 41 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती के तहत 14 जनवरी 2018 को सिविल पुलिस के 23,520 और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) के 18,000 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इस भर्ती की अंतिम चयन सूची 18 फरवरी 2019 को प्रकाशित हुई थी। चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण की अलग-अलग श्रेणियों को लेकर विवाद सामने आया था, जो बाद में अदालत तक पहुंचा।

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याचिकाकर्ताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थी शामिल थे। उन्होंने ओबीसी महिला, ओबीसी पूर्व सैनिक और ओबीसी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणियों में आरक्षण का लाभ दिए जाने की मांग की थी। उनका कहना था कि उनके अंक संबंधित अनारक्षित महिला, पूर्व सैनिक और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणियों के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों के कटऑफ से अधिक थे।

कटऑफ से अधिक अंक, फिर भी चयन से बाहर होने का दावा

अभ्यर्थियों के मुताबिक, पर्याप्त अंक होने के बावजूद उन्हें केवल ओबीसी की संबंधित उपश्रेणी में गिनकर चयन से बाहर कर दिया गया। उनका तर्क था कि अधिक अंक होने के आधार पर उन्हें संबंधित अनारक्षित श्रेणी में भी चयन का अवसर मिलना चाहिए था। इसी आरक्षण विवाद को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

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कुछ अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के अभ्यर्थियों ने भी इसी तरह की राहत की मांग की थी। राज्य सरकार ने इस मामले में चार विशेष अपीलें दाखिल की थीं, जिन्हें अब हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

फैसले से प्रभावित अभ्यर्थियों को चयन में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, नियुक्ति से पहले की अवधि के लिए वेतन और वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलेगा। अदालत ने वित्तीय लाभ को नियुक्ति की तारीख से जोड़कर स्पष्ट कर दिया है कि चयन संबंधी राहत के साथ पिछली अवधि के लाभ स्वतः नहीं मिलेंगे।

Location :  Prayagraj

Published :  29 October 2026, 5:52 AM IST