उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव: तीन महीने में कराना संभव नहीं, सुप्रीम कोर्ट जा सकती है सरकार

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन महीने में मतदान कराने के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है सरकार। ओबीसी आरक्षण सर्वे पूरा न होने, जनगणना और विधानसभा चुनावों की व्यस्तता के कारण तय समयसीमा में चुनाव कराना प्रशासनिक रूप से बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

Updated : 15 October 2026, 11:41 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आगामी तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया है। हालांकि, मौजूदा प्रशासनिक व्यस्तताओं, अन्य चुनावों और जरूरी प्रक्रियाओं को देखते हुए सरकार के लिए इस समयसीमा में चुनाव कराना बेहद कठिन माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है।

क्यों मुश्किल है तीन महीने में चुनाव कराना?

प्रदेश सरकार के लिए निर्धारित तीन महीने के भीतर चुनाव कराना कई वजहों से व्यावहारिक नहीं लग रहा है-

प्रशासनिक व्यस्तताएं और अन्य चुनाव: आने वाले महीनों में राज्य में कई बड़े काम होने हैं। जनगणना का दूसरा चरण 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी के बीच प्रस्तावित है, जिसमें पूरी प्रशासनिक मशीनरी व्यस्त रहेगी। इसके अलावा, जनवरी के पहले सप्ताह में ही विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। ऐसे में सरकार और प्रशासनिक अमले की ऊर्जा व संसाधन दो मोर्चों पर बंट सकते हैं।

ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट का इंतजार: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण तय करने के लिए 20 मई को 'राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया गया था। इस आयोग का छह महीने का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा होगा। आयोग की रिपोर्ट आना अभी बाकी है, क्योंकि वह अब तक प्रदेश के 75 में से केवल 42 जिलों में ही सर्वे और भ्रमण का काम पूरा कर पाया है।

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हाईकोर्ट का फैसला और मौजूदा स्थिति

इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद) ने बुधवार शाम 4:00 बजे खुली अदालत में यह अहम फैसला सुनाया। यह याचिका प्रयागराज के इम्तियाज हुसैन व अन्य द्वारा समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक नए चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक सभी निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे।

गौरतलब है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने के बाद, पिछले साल 25 मई को उन्हें प्रशासक बनाया गया था। इसके बाद जुलाई में ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को भी उनके कार्यकाल की समाप्ति पर प्रशासक नियुक्त कर दिया गया था। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग का दावा है कि वह अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार है और मतदाता सूची भी 10 जून को ही जारी की जा चुकी है।

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सरकार और पंचायतीराज मंत्री का रुख

हाईकोर्ट के इस निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि सरकार का न्यायपालिका के प्रति पूरा सम्मान और विश्वास है। न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना हम सभी का प्राथमिक दायित्व है।

हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी तक न्यायालय का पूरा आदेश पढ़ा नहीं है। आदेश का अध्ययन किए बिना इस पर कोई भी टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए इससे जुड़े सभी पहलुओं पर पूरी गंभीरता से विचार किया जाएगा। आदेश में दिए गए निर्देशों को समझने के बाद ही सरकार अपने अगले कदम और आगे की दिशा पर कोई निर्णय लेगी।

Location :  Lucknow

Published :  15 October 2026, 11:41 AM IST

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