खेती पर अलनीनो का साया: यूपी के किसान अभी से कर लें तैयारी, वरना डूब जाएगी पूरी लागत!

क्या आप जानते हैं कि प्रशांत महासागर में आने वाला एक छोटा सा बदलाव यूपी के किसानों की तकदीर बदल सकता है? जी हाँ, 'अलनीनो' के कारण इस साल राज्य में सूखे का खतरा मंडरा रहा है। खेतों में दरारें पड़ने से पहले और खरीफ फसलों को बचाने के लिए किसानों को अब कमर कसनी होगी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 June 2026, 9:59 AM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार सुस्त रहने वाली है, जिसके चलते प्रदेश में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में यूपी के कई जिलों को आंशिक सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। सामान्य तौर पर राज्य में 18 जून तक मानसून दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार अलनीनो के बढ़ते प्रभाव के कारण इसमें कम से कम एक सप्ताह या उससे अधिक की देरी होने की आशंका है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि इस वर्ष जून से सितंबर के दौरान सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की जा सकती है।

औसत से 90 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, इस बार प्रदेश में बारिश का आंकड़ा औसत के 90 प्रतिशत से भी नीचे रह सकता है। स्थिति जून के महीने में और भी गंभीर होने की संभावना है, जहाँ सामान्य वर्षा की तुलना में 50 प्रतिशत से भी कम बारिश होने का अनुमान लगाया गया है।

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इन फसलों की बुआई और उत्पादन पर पड़ेगा सीधा असर

जून के शुरुआती दिनों में होने वाली बारिश खरीफ की फसलों के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है। विशेषज्ञ के मुताबिक, बारिश न होने या कम होने से हरी सब्जियों जैसे लौकी, करेला, तोरई, भिंडी और ग्वार फली के साथ-साथ अरहर, मक्का और बाजरा जैसी मुख्य फसलों की बुआई और उनके उत्पादन पर बेहद बुरा असर पड़ सकता है।

साल 2015 जैसी स्थिति दोहराने की आशंका

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल अलनीनो का प्रभाव उत्तर प्रदेश को साल 2015 जैसी स्थिति में धकेल सकता है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में जून से सितंबर के दौरान देश भर में सामान्य से केवल 86 से 91 प्रतिशत ही वर्षा हुई थी। उस दौरान कम बारिश के कारण धान और मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलें बर्बाद हो गई थीं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा था और खाद्य महंगाई में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

देश भर में थमी मानसून की रफ्तार

यह संकट केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में शुरुआती दौर में ही मानसून की गति थम गई है। 15 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल 703 जिलों में से केवल 103 जिलों में ही सामान्य बारिश दर्ज की जा सकी है। अकेले महाराष्ट्र में इस बार अब तक 74 फीसदी कम बारिश हुई है। चूंकि भारत में 50 से 60 फीसदी सिंचाई पूरी तरह वर्षा पर ही आधारित है, इसलिए मानसून की यह सुस्ती कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

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फिलहाल पांच दिनों तक गर्मी से राहत नहीं

उत्तर प्रदेश के निवासियों को फिलहाल एक हफ्ते तक इस भीषण गर्मी और तपिश से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह का कहना है कि वर्तमान में यूपी में कोई भी प्रभावी मौसम तंत्र सक्रिय नहीं है। मानसून में देरी की वजह से अगले तीन-चार दिनों तक लू (Heat wave) की परिस्थितियां और तीखी धूप का प्रकोप यूं ही बना रहेगा। हालांकि, बीते बृहस्पतिवार को कानपुर और हमीरपुर में हुई हल्की बूंदाबांदी ने लोगों को मामूली राहत जरूर दी, लेकिन बाकी हिस्सों में गर्मी का तांडव जारी रहा। बांदा 43.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा झांसी में 42.2 डिग्री, प्रयागराज में 41.8 डिग्री और वाराणसी में अधिकतम तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

आज इन 27 जिलों में लू का 'येलो अलर्ट'

मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के तराई और दक्षिणी इलाके के 27 जिलों में लू की चेतावनी जारी करते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। इन प्रभावित जिलों में शामिल हैं-

प्रयागराज, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर और गाजीपुर।

गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या।

मेरठ, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं और इनके आस-पास के क्षेत्र।

Location :  Lucknow

Published :  19 June 2026, 9:59 AM IST