
कांवड़ यात्रा से जुड़ी अनोखी खबर (IMG: Dynamite News)
Meerut: मेरठ-रुड़की हाईवे पर रविवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। सावन की कांवड़ यात्रा के बीच जहां हजारों शिवभक्त भोलेनाथ के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे थे, वहीं अचानक एक जनाजा सामने आ गया। हालात ऐसे थे कि हाईवे पर कांवड़ियों की भारी भीड़ के बीच से जनाजा निकालना चुनौती बन गया था। लेकिन पुलिस की मौजूदगी और शिवभक्तों के सहयोग से ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने इंसानियत और भाईचारे की नई मिसाल कायम कर दी।
हार्ट अटैक से हुई निजाम की मौत, जनाजा निकालने को लेकर थी चिंता
मामला मेरठ के सिवाया गांव का है, जहां रहने वाले 40 वर्षीय निजाम पुत्र शेरदीन की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। परिवार के लोग उनका जनाजा लेकर कब्रिस्तान की ओर जा रहे थे। गांव का कब्रिस्तान हाईवे के दूसरी तरफ स्थित है और उसी रास्ते से बड़ी संख्या में कांवड़िए गुजर रहे थे। कांवड़ यात्रा के चलते हाईवे पर भारी भीड़ थी। ऐसे में परिजनों को चिंता थी कि जनाजे को सुरक्षित तरीके से कैसे निकाला जाए। इसके बाद परिवार ने पुलिस को इसकी सूचना दी।
पुलिस पहुंची, लेकिन व्यवस्था शिवभक्तों ने खुद संभाल ली
जानकारी मिलने के बाद थाना दौराला प्रभारी सुमन कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की तैयारी शुरू की। इसी दौरान कांवड़ियों को जब पता चला कि रास्ते से जनाजा गुजरना है तो उन्होंने खुद आगे बढ़कर व्यवस्था संभाल ली। शिवभक्तों ने दूसरे कांवड़ियों को भी इसकी जानकारी दी और सभी से कुछ देर रुकने की अपील की। देखते ही देखते हाईवे पर मौजूद कांवड़ियों ने जनाजे के लिए रास्ता खाली कर दिया।
जनाजा निकलने तक बंद रहे डीजे, थम गए भोले के जयकारे
सबसे खास बात यह रही कि जैसे ही जनाजा हाईवे से गुजरा, कांवड़ियों ने अपने डीजे बंद कर दिए। भक्ति गीतों और भोलेनाथ के जयकारों से गूंजने वाला पूरा रास्ता कुछ देर के लिए शांत हो गया। हजारों शिवभक्त अनुशासन के साथ खड़े रहे और जनाजे को सम्मान के साथ गुजरने दिया। जनाजा कब्रिस्तान पहुंचने के बाद ही कांवड़ियों ने अपनी यात्रा दोबारा शुरू की और भोलेनाथ के जयकारों के साथ आगे बढ़ गए।
ग्रामीणों ने की शिवभक्तों के व्यवहार की सराहना
इस घटना के बाद सिवाया गांव और आसपास के इलाकों में शिवभक्तों के इस कदम की जमकर सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कांवड़ियों ने सिर्फ रास्ता ही नहीं दिया, बल्कि दूसरे समुदाय के व्यक्ति के अंतिम संस्कार के समय सम्मान दिखाकर मानवता का संदेश भी दिया। सावन की कांवड़ यात्रा के बीच मेरठ की यह तस्वीर आपसी भाईचारे, सम्मान और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गई है। लोगों का कहना है कि यही भारत की साझा संस्कृति और परंपरा की असली पहचान है।
Location : Meerut
Published : 10 August 2026, 6:47 PM IST