UPI पर MDR शुल्क के खिलाफ कानपुर में अनोखा प्रदर्शन, व्यापारियों ने नगाड़े-डमरू से सरकार तक पहुंचाई आवाज

कानपुर में गांधी जयंती के मौके पर व्यापारियों ने UPI पर प्रस्तावित MDR शुल्क के खिलाफ सत्याग्रह किया। सागर मार्केट में भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के बैनर तले जुटे व्यापारियों ने धरना दिया और नगाड़े-डमरू बजाकर विरोध जताया। व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ मनाते हुए निर्धारित समय तक UPI से लेनदेन नहीं किया और शुल्क वापस लेने की मांग की।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 2 October 2026, 6:21 PM IST

Kanpur: गांधी जयंती के दिन जब देश अहिंसा और सत्याग्रह की याद कर रहा था, उसी दिन कानपुर में व्यापारियों ने अपने तरीके से विरोध की आवाज बुलंद कर दी। सागर मार्केट में अचानक नगाड़े और डमरू की आवाज गूंजने लगी। हाथों में पोस्टर लिए बड़ी संख्या में व्यापारी सड़क पर जुटे और UPI पर प्रस्तावित MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट के खिलाफ सत्याग्रह शुरू कर दिया। व्यापारियों ने साफ संदेश दिया कि डिजिटल भुगतान की सुविधा उन्हें मंजूर है, लेकिन UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पोस्टर लेकर किया प्रदर्शन

गांधी जयंती के मौके पर आयोजित सत्याग्रह में सागर मार्केट के आसपास बड़ी संख्या में व्यापारी जुटे। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने अपने हाथों में पोस्टर लेकर UPI पर MDR लगाए जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि आज छोटे से लेकर बड़े कारोबार तक डिजिटल भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। किराना दुकान से लेकर कपड़े, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे कारोबार में ग्राहक UPI के जरिए भुगतान करते हैं। ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि यदि हर डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो कारोबार की लागत बढ़ सकती है। खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन सकता है।

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ढोल-नगाड़े और डमरू बजाकर जताई नाराजगी

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों का विरोध सिर्फ धरने और नारों तक सीमित नहीं रहा। व्यापारियों ने ढोल-नगाड़े और डमरू बजाकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। गांधी जयंती के दिन सत्याग्रह के इस तरीके के जरिए व्यापारियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। नगाड़े और डमरू की आवाज के बीच व्यापारी लगातार UPI पर MDR शुल्क के विरोध में नारे लगाते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और डिजिटल भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क को लागू नहीं किया जाना चाहिए।

व्यापारियों ने मनाया ‘नो UPI डे’

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ भी मनाया। इसके तहत आंदोलन में शामिल व्यापारियों ने निर्धारित समय तक UPI के जरिए कोई लेनदेन नहीं किया। व्यापारियों ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताया। उनका कहना था कि यह कदम डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। व्यापारी खुद भी रोजमर्रा के कारोबार में UPI का इस्तेमाल करते हैं और डिजिटल भुगतान की सुविधा को कारोबार के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका विरोध केवल इस बात को लेकर है कि यदि UPI भुगतान पर MDR लागू किया जाता है तो इसका आर्थिक भार व्यापारियों पर पड़ सकता है।

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छोटे कारोबारियों को लेकर जताई चिंता

व्यापारियों के मुताबिक UPI पर MDR लागू होने का असर सबसे ज्यादा छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पड़ सकता है। छोटे कारोबार में मार्जिन पहले से सीमित होता है। ऐसे में हर लेनदेन पर किसी तरह का शुल्क जुड़ने से कुल खर्च बढ़ सकता है। प्रदर्शन में शामिल व्यापारियों ने कहा कि कारोबारियों के लिए भुगतान की सुविधा जितनी सरल और कम लागत वाली होगी, उतना ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन यदि इसमें अतिरिक्त शुल्क जोड़ा जाता है तो इसका असर व्यापारियों की लागत पर पड़ सकता है।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

व्यापारियों ने कहा कि UPI पर MDR शुल्क उन्हें स्वीकार नहीं है। उनका कहना है कि यदि इस व्यवस्था को लागू किया जाता है या प्रस्तावित शुल्क वापस नहीं लिया जाता है तो आने वाले समय में भी चरणबद्ध तरीके से विरोध किया जाएगा। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि गांधी जयंती पर सत्याग्रह के जरिए उन्होंने अपनी मांग को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखा है। नगाड़े और डमरू बजाने से लेकर ‘नो UPI डे’ तक, प्रदर्शन का मकसद सरकार और संबंधित पक्षों तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाना रहा।

Location :  Kanpur

Published :  2 October 2026, 6:21 PM IST