गोरखपुर में ऑपरेशन कनविक्शन के तहत 2017 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई है। फैसले को कानून की बड़ी जीत माना जा रहा है। इस केस में पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और थाने के पैरोकार ने लगातार नजर बनाए रखी।

सनसनीखेज दुष्कर्म केस (Img: Google)
Gorakhpur: गोरखपुर में एक नाबालिग के साथ हुई हैवानियत के मामले में आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया। 2017 में दर्ज इस सनसनीखेज दुष्कर्म केस में कोर्ट ने अब सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 साल की कठोर सजा दी है। लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने न सिर्फ पीड़िता को न्याय दिलाया, बल्कि समाज में एक कड़ा संदेश भी दिया है कि अपराध करने वालों को देर भले हो लेकिन सजा जरूर मिलती है।
जनपद में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ऑपरेशन कनविक्शन अब असर दिखाने लगा है। इसी अभियान के तहत पुराने मामलों को प्राथमिकता से लेकर उनकी सुनवाई तेज कराई जा रही है। इस केस में भी पुलिस और अभियोजन की सक्रियता के चलते अदालत में मजबूत पैरवी हुई। जिसका नतीजा यह सख्त सजा के रूप में सामने आया।
थाना शाहपुर में दर्ज इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पॉक्सो (ASJ/POCSO-02) कोर्ट में हुई। कोर्ट ने आरोपी अशरफ अली को दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत का यह फैसला पीड़िता के लिए राहत लेकर आया है।
यह मामला साल 2017 का है। जब शाहपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाए गए और केस को मजबूत बनाया गया।
इस केस में पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और थाने के पैरोकार ने लगातार नजर बनाए रखी। वहीं, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राममिलन सिंह ने अदालत में प्रभावी दलीलें पेश कीं। उनकी मजबूत पैरवी के चलते आरोपी को दोषी करार दिया गया और सजा सुनिश्चित हो सकी।
इस फैसले से यह साफ हो गया है कि अब अपराधियों के लिए कानून से बचना आसान नहीं है। गोरखपुर पुलिस की सक्रियता और न्यायिक प्रक्रिया की तेजी से पीड़ितों को समय पर न्याय मिल रहा है। साथ ही समाज में कानून के प्रति भरोसा भी लगातार मजबूत हो रहा है।