
देवघर में हेलीकॉप्टर (Image: Social Media)
Deoghar: देवघर में श्रावणी मेले के बीच श्रद्धालुओं के लिए शुरू की गई हवाई दर्शन सेवा अचानक थम गई है। जिस हथगढ़ मैदान में कुछ दिन पहले तक हेलीकॉप्टर की आवाजाही, श्रद्धालुओं की भीड़ और टेंट की व्यवस्था दिखाई दे रही थी, वहां अब सामान समेटा जा रहा है। हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत 4 अगस्त 2026 को हुई थी। इसका मकसद श्रद्धालुओं को बाबा बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ और त्रिकूट के हवाई दर्शन कराने के साथ देवघर से बासुकीनाथ तक हवाई यात्रा की सुविधा देना था। शुरुआत में सेवा को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
यह सेवा मुफ्त नहीं थी। अलग-अलग रूट के लिए अलग-अलग किराया तय किया गया था। देवघर हवाई दर्शन के लिए 2,850 रुपये, बासुकीनाथ हवाई दर्शन के लिए 2,850 रुपये और देवघर-त्रिकूट हवाई दर्शन के लिए 3,750 रुपये शुल्क निर्धारित था। वहीं देवघर से बासुकीनाथ एकतरफा हेलीकॉप्टर यात्रा के लिए 4,500 रुपये किराया रखा गया था। सेवा के रेट निर्धारण से जुड़े दस्तावेज झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की वेबसाइट पर उपलब्ध बताए जा रहे हैं।
20 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों में हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने की वजह तकनीकी खराबी बताई गई। साथ ही वैकल्पिक मैदान से सेवा शुरू करने की संभावना पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किए जाने की बात भी सामने आई। अगर सिर्फ तकनीकी खराबी ही वजह है तो हेलीकॉप्टर सेवा का अस्थायी रूप से रुकना कोई असामान्य बात नहीं है। हवाई सेवा में यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है और तकनीकी दिक्कत आने पर संचालन रोकना सामान्य प्रक्रिया हो सकती है।
नागर विमानन से जुड़े आधिकारिक Helisewa FAQ के अनुसार किसी विशेष हेलीकॉप्टर लैंडिंग साइट पर ऑपरेशन के लिए लैंडिंग साइट के मालिक की अनुमति जरूरी होती है। साथ ही जिला प्रशासन को भी ऑपरेशन की सूचना दी जाती है। ऐसे में हथगढ़ मैदान को लेकर यह जानना जरूरी हो जाता है कि हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने से पहले जमीन के इस्तेमाल की अनुमति किससे ली गई थी। क्या जमीन के मालिक या संबंधित प्राधिकरण से लिखित अनुमति ली गई थी? क्या जिला प्रशासन को इसकी जानकारी थी? क्या हेलीकॉप्टर के संचालन से जुड़ी सभी जरूरी मंजूरियां पहले ही हासिल कर ली गई थीं?
मामले में सबसे संवेदनशील सवाल जमीन से जुड़े कथित न्यायिक विवाद को लेकर है। स्थानीय स्तर पर कोर्ट के आदेश या स्टे की चर्चा है। हालांकि अभी उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में ऐसा कोई स्पष्ट न्यायिक आदेश सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि अदालत ने हेलीकॉप्टर सेवा पर रोक लगाई थी। इसलिए फिलहाल कोर्ट के कथित आदेश को तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इस मामले में देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में फिलहाल प्रशासन की ओर से सेवा बंद होने की पूरी वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। यहां यह भी समझना जरूरी है कि बिना आधिकारिक कोर्ट आदेश या जमीन से जुड़े दस्तावेज देखे किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाना सही नहीं होगा।
श्रावणी मेले के दौरान देवघर में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा बैद्यनाथ धाम के दर्शन के साथ त्रिकूट और बासुकीनाथ के हवाई दर्शन की सुविधा लोगों के लिए नया आकर्षण बनी थी। शुरुआत में यात्रियों की संख्या कम रही, लेकिन बाद में इसमें बढ़ोतरी हुई। रिपोर्टों के मुताबिक सेवा बंद होने से पहले करीब 100 लोग रोजाना हवाई दर्शन कर रहे थे।
पूरे मामले में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हथगढ़ मैदान से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने से पहले जमीन और संचालन से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं या नहीं। अगर सभी अनुमति मौजूद थीं और सेवा सिर्फ तकनीकी खराबी के कारण बंद हुई है तो प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं अगर जमीन से जुड़ा कोई विवाद सामने आया है तो उसके दस्तावेज और न्यायिक स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
Location : Deoghar
Published : 21 August 2026, 8:41 PM IST