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इन दिनों मध्यप्रदेश की भाजपा (BJP) सरकार को अपने ही मंत्रियों की बदजुबानी के चलते लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट
मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह और कर्नल सोफिया कुरैशी
नई दिल्ली: भाजपा के बड़बोले नेताओं ने देश का सियासी पारा चढ़ा दिया है। बीते सोमवार को एमपी के मंत्री विजय शाह का कर्नल सोफिया कुरैशी पर अभद्र टिप्पमी करना भाजपा के बड़बोले नेताओं को महंगा पड़ गया है। इसके चलते बीजेपी को समाजवादी वार्टी, कांग्रेस और अन्य पार्टियों को जवाब देना भारी पड़ रहा है। अब ऐसे में शाह के बयान के बाद यूपी की सियासत में हलचल तेज हो गई।
एक ओर जहां शाह के बयान ने यूपी की राजनीति में भूचाल ला दिया है, तो वही दूसरी ओर भापजा के कुछ नेता शाह का समर्थन कर रहे हैं। समर्थन में सहयोगी मंत्री प्रतिमा बागरी का नाम सामने आया है। सहयोगी मंत्री प्रतिमा बागरी का कहना है कि, 'शाह के बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।
कांग्रेस और खुद भाजपा समेत विपक्षी दलों के कई नेता शाह के बयान को लेकर उन पर हमलावर हैं। मंत्री विजय शाह के खिलाफ पार्टी हाईकमान से कार्रवाई की मांग की जा रही है। दूसरी ओर बीजेपी हाईकमान भी मंत्री शाह के इस बयान से खुश नहीं है। शाह के बयान पर राज्य और केंद्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। लेकिन, पार्टी की चुप्पी और ढीले रवैये ने संगठन की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिर्फ विजय शाह अकेले ऐसे मंत्री नहीं हैं जिनकी वजह से BJP पार्टी मुश्किल में है, ऐसे कई मंत्री हैं जिनके बयानों ने BJP पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई हैं। ऐसे में जानते हैं, उन मंत्रियों का हाल जिनके बयान चर्चा में रहे।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कुछ समय पहले राजगढ़ जिले के सुठालिया में लोधी समाज के एक सम्मेलन के दौरान कहा था, "हर कोई आकर मांगों का ज्ञापन थमा देता है... जैसे हम भीख मांगने आए हों..."। मंत्री का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। विपक्ष ने इसे जनता का अपमान बताया और सरकार की सोच पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर भी मंत्री के इस बयान की तीखी आलोचना हुई।
अतिथि शिक्षकों पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह की टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया था। एक कार्यक्रम में मंत्री ने कहा था कि सरकार अतिथि शिक्षकों के हितों की अनदेखी नहीं करेगी, लेकिन उनकी "उपयोगिता" की भी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा था, "जब उनका नाम ही अतिथि शिक्षक है, तो वे अतिथि के रूप में आए हैं, तो क्या वे घर पर कब्जा करेंगे?" उनकी टिप्पणी पर शिक्षकों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। शिक्षकों ने कहा कि वे कम वेतन और अस्थायी पदों पर वर्षों से सेवा कर रहे हैं, लेकिन अब उनके साथ 'कब्जाधारी' जैसा व्यवहार किया जा रहा है।
कुछ महीने पहले प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह ने एक परामर्श जारी किया था। प्रदेश में खाद की कमी के बारे में मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रदेश में कहीं भी खाद की कमी नहीं है। अगर कहीं खाद की कमी है तो मुझे बताएं, मैं खाद पहुंचाता हूं। मंत्री ने कहा, "मुझे किस जिले और किस तहसील में खाद की जरूरत है। हालांकि, यह खाद विभाग का मामला है। इसका वितरण विभाग करता है। आप मेरे लिए पूछ रहे हैं इसलिए मैं उत्तर दे रहा हूं। खाद वितरण मेरा काम नहीं है।"
मंत्री विजय शाह ने सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी। पिछले सोमवार को मानपुर में आयोजित हलमा कार्यक्रम में शाह ने कहा था कि, "पहलगाम में जिन आतंकियों ने लोगों की हत्या की, उनके कपड़े उतार दिए गए। उन आतंकियों ने हमारी बहनों का सिंदूर नष्ट कर दिया। प्रधानमंत्री ने अपनी ही बहन को भेजकर उनके साथ ऐसा किया।" कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन कहना विजय शाह और भाजपा के लिए भी मुसीबत बन गया है।
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