शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने क्यों कहा- RSS प्रमुख मोहन भागवत शादी करके 3 बच्चे पैदा करें

बरेली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के तीन बच्चे वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। साथ ही गौ-रक्षा कानून, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और चुनावी मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 5 April 2026, 3:40 PM IST

Bareilly: बरेली में रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणियां की। खास तौर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ‘तीन बच्चे’ वाले बयान पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर जनसंख्या बढ़ाना इतना जरूरी है तो पहले खुद शादी करके उदाहरण पेश करें। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

RSS प्रमुख के बयान पर कसा तंज

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के तीन बच्चे पैदा करने वाले बयान पर सवाल पूछा गया तो शंकराचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे पहले भी कह चुके हैं कि अगर जनसंख्या बढ़ाना इतना जरूरी है तो मोहन भागवत और उनके प्रचारक खुद विवाह करें और बच्चे पैदा करें। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार जनसंख्या विस्फोट की बात करती है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग जनसंख्या बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब यह इतना जरूरी है तो खुद ऐसा क्यों नहीं करते।

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मथुरा में भागवत ने कही थी यह बात

दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कई बार यह कह चुके हैं कि हिंदुओं के लिए तीन बच्चे होना जरूरी है। पिछले महीने मथुरा दौरे के दौरान भी उन्होंने कहा था कि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी परिवार में तीन बच्चे होते हैं तो माता-पिता और बच्चों के स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा था कि तीन बच्चों वाले परिवारों में बच्चों का व्यक्तित्व संतुलित और बेहतर विकसित होता है और आपसी टकराव भी कम होते हैं।

गौ-रक्षा कानून की मांग दोहराई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने गौ-रक्षा के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सरकार को इस मुद्दे पर कानून बनाने के लिए समय दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार गो-माता की रक्षा के लिए कानून बनाए तो वे उसके साथ खड़े हो जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं, बल्कि जो उनकी बात सुनेगा, वे उसी के साथ खड़े होंगे।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी बोले

देवभूमि इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य ने अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब भी युद्ध होता है तो उसमें दो पक्ष होते हैं- एक न्याय का और दूसरा अन्याय का। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज दुनिया में अमेरिका और इजराइल एक तरफ हैं, जबकि दूसरी ओर ईरान खड़ा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दुनिया के कई विद्वान मौन हैं, जो मानवता के लिए चिंता का विषय है।

प्रधानमंत्री के रुख पर उठाए सवाल

शंकराचार्य ने कहा कि युद्ध जैसे मुद्दों पर एक विद्वान का दायित्व होता है कि वह स्पष्ट बताए कि कौन अन्याय कर रहा है और कौन अन्याय सह रहा है। उन्होंने कहा कि भारत पारंपरिक रूप से गुटनिरपेक्ष देश रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन के कारण लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के कारण गैस सिलेंडर की किल्लत जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं, लेकिन आम जनता की परेशानियों को लेकर सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए।

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चुनावी मुद्दों पर भी दी सलाह

शंकराचार्य ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दे सामने लाए जाएंगे, लेकिन जनता को इनसे भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने मूल मुद्दों के आधार पर ही वोट करें। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में गो-माता का विशेष महत्व है और घरों में बनने वाली पहली रोटी हमेशा गाय को खिलाने की परंपरा रही है।

धार्मिक यात्रा के दौरान पहुंचे बरेली

शंकराचार्य ने बताया कि वे वाराणसी से दिल्ली होते हुए ऋषिकेश जा रहे हैं। भगवान बद्रीनाथ के ग्रीष्मकालीन पट खुलने की परंपरा के तहत ज्योति के तेल का घड़ा राजपरिवार की ओर से ऋषिकेश पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल को यह घड़ा ज्योर्तिमठ होते हुए बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना किया जाएगा। इसी यात्रा के दौरान वे बरेली में भी रुके, क्योंकि यहां के विद्वानों ने सनातन धर्म को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Location : 
  • Bareilly

Published : 
  • 5 April 2026, 3:40 PM IST