Sawan 2026: सावन से पहले रुद्राक्ष के मनकों से पटी बाबा विश्वनाथ की नगरी, जानिए नेपाली और जावा दानों की असली कीमत

Sawan 2026: सावन में काशी के बाजारों में नेपाल और इंडोनेशिया से करीब तीन करोड़ रुद्राक्ष पहुंचे हैं। इस बार 30 दिनों में 30 करोड़ से अधिक का व्यापार होने की उम्मीद है। जानिए दुर्लभ एक मुखी से लेकर 14 मुखी रुद्राक्ष की कीमतें और अहमियत।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 3 July 2026, 4:33 PM IST

Varanasi: इस साल 30 जुलाई से शुरू हो रहे पावन सावन महीने को लेकर धर्मनगरी काशी में शिवभक्तों के साथ-साथ व्यापारियों का उत्साह भी सातवें आसमान पर है। इस बार सावन के महीने में रुद्राक्ष की बिक्री में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। महादेव की नगरी वाराणसी के बाजारों में शिवभक्तों के लिए लगभग तीन करोड़ रुद्राक्ष की एक बहुत बड़ी खेप पहुंच चुकी है।

सावन के इस पावन सीजन में काशी के कारोबारी अभी से ही डीलरों से थोक भाव में रुद्राक्ष खरीदने में जुट गए हैं। स्थानीय व्यापारियों और बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार सावन के महज 30 दिनों के भीतर रुद्राक्ष और उससे बनी मालाओं का कारोबार 30 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाएगा।

नेपाल और इंडोनेशिया के दानों की मची धूम

काशी के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों जैसे दशाश्वमेध, गोदौलिया, विश्वनाथ गली, चौक और मैदागिन के थोक और फुटकर बाजार इस समय पूरी तरह से रुद्राक्ष की मालाओं से पटे पड़े हैं। बाजार में 100 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की कीमत के रुद्राक्ष उपलब्ध हैं, जिनमें एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक के रुद्राक्षों की भारी मांग है।

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कारोबारियों के मुताबिक, नेपाल से आने वाले बड़े और गहरे धारी वाले रुद्राक्ष अपनी खास बनावट और ज्योतिषीय महत्व के कारण काफी महंगे दामों पर बिक रहे हैं। दूसरी ओर, इंडोनेशिया (जावा) से आए छोटे और चिकने आकार के रुद्राक्ष के दानों की मांग कंठी माला, ब्रेसलेट और कंगन बनाने के लिए सबसे ज्यादा की जा रही है।

रुद्राक्ष के अद्भुत शृंगार से सजेगा बाबा कालभैरव का गर्भगृह

सावन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर सहित जिले के तमाम प्रमुख शिवालयों जैसे महामृत्युंजय मंदिर, सारंगनाथ महादेव और केदारेश्वर मंदिर में रुद्राक्ष का अद्भुत नजारा दिखेगा। इस बार सावन में भगवान शिव को न केवल रुद्राक्ष अर्पित किए जाएंगे, बल्कि मंदिरों में इनका भव्य शृंगार भी होगा।

कई भक्त कमेटियों ने बाबा विश्वनाथ और अष्टभैरव के शृंगार के लिए सवा लाख से लेकर 11 लाख रुद्राक्ष की मालाओं की बुकिंग एडवांस में ही कर ली है। कालभैरव मंदिर के महंत मोहित योगेश्वर ने बताया कि सावन के हर सोमवार को इन दिव्य रुद्राक्षों से पूरी पीठ और गर्भगृह को विशेष रूप से सजाया जाएगा, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।

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रुद्राक्ष की कीमतें और बाजार का गणित

बाजार के आंकड़ों के अनुसार, नेपाली और इंडोनेशियाई रुद्राक्ष की कीमतों में उनकी दुर्लभता के आधार पर बड़ा अंतर है। जहां आम तौर पर इस्तेमाल होने वाला 5 मुखी नेपाली दाना 100 रुपये से 500 रुपये के बीच मिल रहा है, वहीं इसका इंडोनेशियाई विकल्प मात्र 10 रुपये से 50 रुपये में उपलब्ध है।

सबसे ज्यादा मांग वाले 11 से 14 मुखी नेपाली रुद्राक्ष की कीमत 15,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये से भी अधिक जा रही है। वहीं, सबसे दुर्लभ माना जाने वाला गोल एक मुखी और 15 मुखी से ऊपर का नेपाली रुद्राक्ष बाजार में 1 लाख रुपये से लेकर कई लाख रुपये की कीमत तक बिक रहा है। शिवभक्त अपनी श्रद्धा और बजट के अनुसार जमकर खरीदारी कर रहे हैं।

Location :  Varanasi

Published :  3 July 2026, 4:33 PM IST