ग्रेटर नोएडा के सबसे कुख्यात गैंगस्टर रवि काना ने जेल प्रशासन को फंसाया, अधीक्षक और डिप्टी जेलर समेत 3 सस्पेंड, जानें पूरा मामला

गैंगस्टर रवि काना की संदिग्ध रिहाई के मामले में बांदा जेल अधीक्षक और डिप्टी जेलर निलंबित कर दिए गए हैं। जेल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं और पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 5 February 2026, 2:02 PM IST

Greater Noida: उत्तर प्रदेश की जेल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कुख्यात गैंगस्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना की रिहाई के मामले में अब बड़ी कार्रवाई हुई है। बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम और डिप्टी जेलर निर्भय सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं। इससे पहले इस मामले में जेलर विक्रम सिंह को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। इस पूरे घटनाक्रम ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बी-वारंट पर पेशी, फिर अचानक रिहाई

दरअसल, कुख्यात बदमाश रवि काना बांदा जेल में बंद था। गौतमबुद्ध नगर न्यायालय ने वसूली के एक मामले में उसे बी-वारंट पर तलब किया था। 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी पेशी कराई गई। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसी दिन शाम होते-होते जेल प्रशासन ने रवि काना को रिहा कर दिया। जब इस रिहाई की जानकारी गौतमबुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को हुई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए डीजी जेल और बांदा जेल अधीक्षक से जवाब तलब किया। साथ ही यह भी कहा गया कि क्यों न गैंगस्टर को फरार कराने का मामला दर्ज किया जाए।

दबाव बढ़ा तो हुई कार्रवाई

मामले के सामने आने के बाद पहले इसे मैनेज करने की कोशिशें की गई। शुरुआत में केवल जेलर को निलंबित कर मामले को हल्का दिखाने का प्रयास हुआ। जेल अधीक्षक के खिलाफ सिर्फ जांच की बात कही जा रही थी और यह तक कहा गया कि बंदी की रिहाई में उनकी कोई भूमिका नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे मामला तूल पकड़ता गया और न्यायालय से जुड़े होने के कारण दबाव बढ़ा, वैसे ही जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इसके बाद शासन के निर्देश पर जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम को भी निलंबित कर दिया गया।

डीजी जेल की पुष्टि

डीजी जेल पीसी मीणा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पहले डिप्टी जेलर निर्भय सिंह को निलंबित किया गया। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने जेल अधीक्षक के खिलाफ भी कार्रवाई की। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच जारी है।

एफआईआर में अभी रवि काना का नाम नहीं

इस प्रकरण में जेल अधीक्षक, जेलर और अन्य जेल अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि अभी तक गैंगस्टर रवि काना को आरोपी नहीं बनाया गया है। एसपी बांदा पलाश बंसल का कहना है कि रिहाई की पूरी लिखापढ़ी अफसरों द्वारा की गई थी। अगर विवेचना में बंदी और जेल अधिकारियों के बीच सांठगांठ के सबूत मिलते हैं तो रवि काना को भी आरोपी बनाया जाएगा और धाराएं बढ़ाई जाएंगी।

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  • 5 February 2026, 2:02 PM IST