
अयोध्या का राम मंदिर (सोर्स-Pinterest)
Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में दान चोरी के चर्चित मामले को लेकर तीखा असंतोष जताया गया, लेकिन जिम्मेदारियों के निर्धारण में न्यासी मंडल का रुख पूरी तरह एकतरफा रहा। पूरे प्रकरण का ठीकरा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के सिर फोड़ते हुए उसकी लापरवाही और नियमों की अनदेखी को ही मुख्य वजह बता दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इस गंभीर चोरी के पीछे ट्रस्ट के अपने ही आला अधिकारियों और जिम्मेदार सदस्यों की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन द्वारा जारी बैठक के ब्योरे के अनुसार, एसबीआई के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत बैंक के कर्तव्यों और उनके अनुपालन की समीक्षा की गई। ट्रस्टियों ने आरोप लगाया कि बैंक ने तय कार्यप्रणाली और नियमों को दरकिनार किया, जिसकी वजह से दान की गणना में भारी गड़बड़ियां हुईं। बैठक में बैंक प्रबंधन पर सारा दोष मढ़ते हुए अपनी हताशा जताई गई, लेकिन इस तथ्य को पूरी तरह दबा दिया गया कि एमओयू की शर्तों में ढिलाई देने की शुरुआत खुद ट्रस्ट के तत्कालीन सदस्य अनिल मिश्रा के स्तर पर हुई थी। एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की इस शिथिलता का साफ-साफ उल्लेख किया गया था, फिर भी बैठक में उनके नाम पर चुप्पी साधे रखी गई।
एसआईटी जांच में बैंक अधिकारियों व कर्मियों की संदिग्ध भूमिका के साथ-साथ ट्रस्ट के आंतरिक प्रबंधन की कई बड़ी खामियां उजागर हुई थीं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने आखिर किस अधिकार के तहत टिन्नू यादव को इतने असीमित अधिकार दे रखे थे? टिन्नू यादव के पास दान पात्रों की चाबियां और गणना कक्ष का अनधिकृत नियंत्रण होना ही इस चोरी की सबसे बड़ी वजह बनी। इसके बावजूद, बैठक में चंपत राय के इन संदिग्ध फैसलों और पुलिस कार्रवाई की सुस्त रफ्तार पर कोई चर्चा नहीं हुई।
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दान चोरी का भांडाफोड़ होने के बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों की पुष्टि की थी। अब ट्रस्ट का प्रशासनिक काम-काज अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के हाथों में आ गया है। वहीं, मामले की लीपापोती के बीच ट्रस्ट ने भविष्य के लिए प्रक्रिया को सख्त करने की बात कही है-
वित्त समिति की बैंक से वार्ता: ट्रस्ट की वित्त समिति जल्द ही एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेगी।
सख्त एमओयू लागू करने की योजना: दान की गिनती में दोबारा सेंधमारी न हो, इसके लिए एमओयू के नियमों को और अधिक कड़ा व अभेद्य बनाने का निर्णय लिया गया है।
Location : Ayodhya
Published : 23 July 2026, 9:44 AM IST