
राकेश टिकैत ने उठाया बड़ा सवाल (IMG: Dynamite News)
Muzaffarnagar: चीनी के दाम लगातार बढ़ने से आम लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। बाजार में जहां पहले 40 से 45 रुपये किलो के आसपास चीनी आसानी से मिल जाती थी, वहीं कई जगह इसकी कीमत 60 रुपये किलो तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। बढ़ती कीमतों के बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार और चीनी कारोबार से जुड़े लोगों पर सवाल खड़े किए हैं। टिकैत का कहना है कि चीनी की कीमत बढ़ रही है, लेकिन इसका फायदा गन्ना किसानों को नहीं मिल रहा। उनका सवाल है कि जब चीनी मिलों और व्यापारियों की कमाई बढ़ रही है तो गन्ना पैदा करने वाले किसान को भी उसका हिस्सा क्यों नहीं मिलना चाहिए।
राकेश टिकैत ने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने के साथ गन्ने की कीमत भी बढ़ाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि चीनी मिलों को अगर बाजार में बढ़ी हुई कीमत का फायदा मिल रहा है तो किसानों को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। टिकैत ने सवाल उठाते हुए कहा कि चीनी के दाम बढ़ने से जो पैसा मिल मालिकों और कारोबारियों के पास जा रहा है, उसमें किसान का हिस्सा कहां है। किसान गन्ना पैदा करता है, लेकिन कीमत बढ़ने का लाभ अक्सर दूसरे स्तर पर दिखाई देता है।
टिकैत ने चीनी के बड़े स्टॉक रखने वाले कारोबारियों पर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि बड़े-बड़े स्टॉक होल्डर बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास बड़े स्तर पर चीनी का स्टॉक होता है, वे कीमतों को बढ़ाने और घटाने में भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकार को बाजार पर नजर रखने और जमाखोरी या कृत्रिम तरीके से कीमत बढ़ाने की स्थिति पर नियंत्रण करना चाहिए।
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किसान नेता ने खाद्य क्षेत्र में बड़ी कंपनियों की बढ़ती भूमिका को लेकर भी सरकार से सवाल किया। उनका कहना है कि जब बड़ी-बड़ी कंपनियां फूड सेक्टर में आएंगी तो खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखना सरकार की जिम्मेदारी होगी। टिकैत के मुताबिक सरकार को यह तय करना होगा कि किस वस्तु के दाम कितने बढ़ सकते हैं और बढ़ी कीमत का लाभ किसे मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बाजार में चीनी की कीमत बढ़ रही है तो सरकार को यह भी देखना चाहिए कि किसानों को इसका लाभ मिल रहा है या नहीं।
राकेश टिकैत ने इथेनॉल को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों के गन्ने से इथेनॉल बनाया जा रहा है, लेकिन किसानों को इसका सीधा और पर्याप्त फायदा मिलना चाहिए। उन्होंने इथेनॉल के कारण गाड़ियों के खराब होने से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह बात अक्सर प्रचार के तौर पर सामने आती है। टिकैत ने कहा कि अगर इथेनॉल से किसी की गाड़ी खराब हुई है तो उसका उदाहरण सामने लाया जाना चाहिए।
गन्ने का नया सीजन नजदीक आने के साथ ही किसानों की नजर अब गन्ने के रेट को लेकर सरकार के फैसले पर है। किसान संगठनों की ओर से लगातार मांग की जाती रही है कि उत्पादन लागत बढ़ने और बाजार में चीनी की कीमतों में बदलाव के हिसाब से किसानों को भी बेहतर मूल्य मिलना चाहिए। राकेश टिकैत ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि चीनी की कीमत बढ़ने का असर अगर मिल मालिकों और व्यापारियों की कमाई पर पड़ रहा है तो किसान को उससे अलग नहीं रखा जा सकता।
Location : Muzaffarnagar
Published : 21 August 2026, 2:15 PM IST