Raebareli Shocking: 4 महीने की बच्ची ने इस गंभीर बीमारी को दी मात, जगी नई उम्मीद

रायबरेली के खीरों निवासी चार महीने की एक बच्ची को तीन महीने पहले सांस लेने की शिकायत के साथ AIIMS रायबरेली की आपातकालीन विभाग में लाया गया था और निमोनिया की आशंका के आधार पर बच्ची को डॉ. नमिता मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर के सक्षम मार्गदर्शन में पीआईसीयू में भर्ती किया गया और वेंटीलेटर पर रखा गया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 29 January 2026, 6:45 PM IST

Raebareli: रायबरेली के खीरों निवासी चार महीने की एक बच्ची को तीन महीने पहले सांस लेने की शिकायत के साथ AIIMS रायबरेली की आपातकालीन विभाग में लाया गया था और निमोनिया की आशंका के आधार पर बच्ची को डॉ. नमिता मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर के सक्षम मार्गदर्शन में पीआईसीयू में भर्ती किया गया और वेंटीलेटर पर रखा गया। उपचार के दौरान बच्ची में हाथ पैर की कमजोरी पाई गई तथा उसकी बड़ी बहन में भी 3 महीने की उम्र में इसी प्रकार की शिकायतों का इतिहास पाया गया, जिसका समय पर निदान और इलाज ना मिलने के कारण मृत्यु हो गई थी।

इस बच्ची में आनुवंशिक जाँच के बाद स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy – SMA) का निदान किया गया। यह एक गंभीर आनुवंशिक रोग है, जो उन नसों को प्रभावित करता है जो मांसपेशियों को नियंत्रित करती हैं। जब ये नसें सही तरीके से कार्य नहीं करतीं, तो समय के साथ मांसपेशियाँ कमजोर और पतली हो जाती हैं। परिणामस्वरूप रोगी को बैठने, खड़े होने, चलने में कठिनाई होती है तथा गंभीर अवस्था में साँस लेने और निगलने में भी परेशानी होती है।

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इस रोग का उपचार करोड़ों में है, लेकिन नई दवा रिसडिप्लाम (Risdiplam) अपेक्षाकृत सस्ती है और वर्तमान में व्यापक शोध के अंतर्गत उपयोग की जा रही है। इस रोगी में इसके उपयोग से काफ़ी सुधार देखा गया। ये दवाई लखनऊ से मंगवाई गई थी। रोगी को 5 सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया, इसके बाद धीरे-धीरे ऑक्सीजन सपोर्ट पर लाया गया और वर्तमान में बच्ची रूम एयर पर है।

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डॉ. राजकुमार, सहायक प्रोफेसर ने रोगी के स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. मृत्युंजय कुमार, विभागाध्यक्ष (HOD), बाल रोग विभाग ने रोगी के संपूर्ण प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन के नेतृत्व में एम्स स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छू रहा है। डॉ. नीरज कु. श्रीवास्तव, AMS (अपर चिकित्सा अधीक्षक) ने इस उपलब्धि के लिए बाल रोग विभाग की टीम को बधाई दी। आज, तीन महीने के अस्पताल भर्ती के बाद, रोगी को डिस्चार्ज किया जा रहा है।

Location : 
  • Raebareli

Published : 
  • 29 January 2026, 6:45 PM IST