एटा के वीरांगना अवन्तिबाई लोधी राजकीय स्वशासी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में अचानक बिजली गुल होने से हड़कंप मच गया। करीब आधे घंटे तक अंधेरे में डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज किया। बैकअप व्यवस्था पर सवाल उठे और तीमारदारों में आक्रोश दिखा। घटना ने अस्पताल की आपात तैयारी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।

टॉर्च की रोशनी में चला इलाज
Etah: जिला के वीरांगना अवन्तिबाई लोधी राजकीय स्वशासी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में उस समय हड़कंप मच गया, जब अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई। घटना के समय वार्ड में कई मरीज भर्ती थे और कुछ गंभीर हालत में उपचार ले रहे थे। बिजली जाते ही पूरे इमरजेंसी कक्ष में अंधेरा छा गया, जिससे डॉक्टरों और स्टाफ को तत्काल स्थिति संभालनी पड़ी। अचानक हुए ब्लैकआउट से मरीजों और उनके परिजनों में घबराहट फैल गई।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज जारी रखना पड़ा। तीमारदारों ने भी अपने मोबाइल की लाइट जलाकर चिकित्सा कर्मियों की मदद की, तब जाकर उपचार की प्रक्रिया किसी तरह चल सकी। अंधेरे में दवाएं देना, इंजेक्शन लगाना और मॉनिटरिंग करना स्टाफ के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
करीब आधे घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से इमरजेंसी में भर्ती मरीजों की मुश्किलें बढ़ गईं। कई गंभीर मरीजों के परिजनों में दहशत का माहौल देखा गया। कुछ तीमारदारों ने आरोप लगाया कि बैकअप व्यवस्था समय पर चालू नहीं हुई, जिससे स्थिति और खराब हो गई। जनरेटर और वैकल्पिक बिजली व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अंधेरे में कुछ समय तक चिकित्सा उपकरण भी ठीक से काम नहीं कर पाए, जिससे इलाज प्रभावित हुआ। हालांकि डॉक्टरों और स्टाफ ने हालात पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की और किसी बड़ी अनहोनी से बचाव हो गया, लेकिन इस घटना ने अस्पताल की आपात तैयारियों की पोल खोल दी।
घटना के बाद तीमारदारों में आक्रोश देखने को मिला। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी स्वास्थ्य संस्था में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। इमरजेंसी वार्ड में निर्बाध बिजली आपूर्ति और मजबूत बैकअप सिस्टम होना जरूरी है, लेकिन यहां व्यवस्थाएं कमजोर नजर आईं।
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अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारणों की जांच कराई जाएगी। साथ ही बैकअप सिस्टम की कार्यक्षमता को लेकर भी समीक्षा की बात कही जा रही है।
इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इमरजेंसी जैसे संवेदनशील विभाग में बिजली संकट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।