सिर्फ SC/ST होने से नहीं लागू होता एक्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से मची सनसनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल एससी/एसटी समुदाय का होने मात्र से किसी विवाद पर एससी/एसटी एक्ट की धाराएं नहीं लग सकतीं।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 12 September 2026, 12:13 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST एक्ट) के बारे में एक अहम बात कही है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती कि कोई व्यक्ति SC या ST समुदाय से है। इस कानून के तहत अपराध तभी माना जाता है जब आरोपी ने जान-बूझकर पीड़ित की जाति के आधार पर उसका अपमान किया हो।

हाई कोर्ट ने यह बात गाजियाबाद में जमीन के सौदे से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कही। कोर्ट ने आरोपी राजू कुरैशी (उर्फ उमरदराज) के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत शुरू की गई कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया।

जमीन विवाद को लेकर FIR दर्ज

यह मामला गाजियाबाद के लोनी पुलिस स्टेशन इलाके के बंथला गांव का है। 2015 में दर्ज एक FIR में राजू कुरैशी पर धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य अपराधों के साथ-साथ SC/ST एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जमीन के सौदे के दौरान आरोपी ने 2.41 लाख रुपये का एडवांस पेमेंट लेने के बावजूद सेल डीड (बिक्री विलेख) नहीं किया और धोखाधड़ी की। पीड़ित ने इस मामले में SC/ST एक्ट के तहत भी आरोप लगाए थे।

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आरोपी ने हाई कोर्ट में मामले को चुनौती दी

गाजियाबाद की एक विशेष SC/ST कोर्ट ने राजू कुरैशी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद आरोपी ने पूरी कार्यवाही को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि यह मामला असल में जमीन के सौदे से जुड़ा एक सिविल विवाद था। इसमें जाति-आधारित अपशब्दों के इस्तेमाल या सार्वजनिक अपमान का कोई आरोप नहीं था।

जाति के आधार पर अपमान का इरादा जरूरी

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संतोष राय की अध्यक्षता वाली सिंगल-जज बेंच ने कहा कि SC/ST एक्ट तभी लागू होता है जब यह साबित हो जाए कि आरोपी ने जान-बूझकर पीड़ित की जाति के आधार पर उसका अपमान किया है। कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट के प्रावधान सिर्फ इसलिए लागू नहीं किए जा सकते कि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का है; इसके लिए जाति के आधार पर अपमान और आरोपी का ऐसा करने का इरादा होना जरूरी है।

सबूत न होने के कारण SC/ST एक्ट के तहत कार्यवाही रद्द

हाई कोर्ट को केस डायरी या रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने जाति-आधारित अपशब्दों का इस्तेमाल किया या पीड़ित को सबके सामने अपमानित किया। कोर्ट ने कहा कि प्रॉपर्टी या सिविल विवाद को जाति-आधारित आरोपों वाले क्रिमिनल केस में बदलने की कोशिश कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग हो सकती है।

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धोखाधड़ी के आरोपों पर कार्यवाही जारी रहेगी

हाई कोर्ट ने SC/ST एक्ट के तहत राजू कुरैशी के खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोपों से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी।

Location :  Prayagraj

Published :  12 September 2026, 12:12 PM IST