प्रयागराज माघ मेले में माघी पूर्णिमा तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान कर नया कीर्तिमान बनाया। महाकुंभ को छोड़ दें तो यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बन गया है। महाशिवरात्रि तक यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है।

माघ मेले ने रच दिया वैश्विक रिकॉर्ड(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Prayagraj: प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 ने आस्था, एकता और भारतीय संस्कृति की अद्भुत शक्ति का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी लगाने वालों की संख्या ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मेला प्रशासन के अनुसार माघी पूर्णिमा स्नान पर्व तक महज 30 दिनों में 21 करोड़ से अधिक धर्मावलंबियों ने संगम स्नान कर ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
माघ मेले को समाप्त होने में अभी करीब 14 दिन शेष हैं। अंतिम और सबसे प्रमुख स्नान पर्व महाशिवरात्रि अभी बाकी है। ऐसे में प्रशासन का अनुमान है कि श्रद्धालुओं की संख्या आने वाले दिनों में और तेज़ी से बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि माघ मेले का यह संस्करण अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बन सकता है।
अगर महाकुंभ-2025 को अलग कर दिया जाए, तो भारत के किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का जुटना अभूतपूर्व है। माघ मेला अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर मानव एकत्रीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।
माघ मेले में आए श्रद्धालुओं की संख्या दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। इनमें रूस, जापान, फ्रांस, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, सिंगापुर, इस्राइल, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, ग्रीस, पुर्तगाल, बेल्जियम, चिली और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश शामिल हैं। यह आंकड़ा भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति को वैश्विक मंच पर स्थापित करता है।
त्रिवेणी संगम में स्नान (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
मेला प्रशासन के अनुसार संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या उत्तर प्रदेश की कुल आबादी के लगभग 80 प्रतिशत के बराबर है। यह आंकड़ा न केवल आयोजन की विशालता को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं की क्षमता और समर्पण को भी उजागर करता है।
इस माघ मेले में केवल उत्तर प्रदेश या भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। साधु-संतों, कल्पवासियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की मौजूदगी ने मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। आस्था के इस महासंगम ने भाषा, क्षेत्र और राष्ट्रीय सीमाओं को पीछे छोड़ दिया।
इतनी विशाल भीड़ के बावजूद माघ मेला शांति, अनुशासन और सहयोग का प्रतीक बना रहा। करोड़ों लोगों का एक साथ संगम तट पर स्नान करना मानव इतिहास में एक दुर्लभ दृश्य है। माघ मेले ने यह सिद्ध कर दिया कि आस्था लोगों को जोड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है।
इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक संचालित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी। सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य और व्यवस्थाओं के मोर्चे पर प्रशासन की तैयारी और समन्वय की देश-विदेश में सराहना हो रही है।
माघ मेले ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता को भी नई पहचान दी है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, संयम और सामूहिक चेतना का जीवंत उदाहरण बन गया है।