‘एक नाम, दो लोग और 166 दिन की जेल’: राजस्थान पुलिस की लापरवाही से बेगुनाह सिपाही ने झेला दर्द

राजस्थान पुलिस की एक बेहद चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। लखनऊ में तैनात सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को पुलिस ने नाम के कन्फ्यूजन में गिरफ्तार कर 166 दिनों तक जेल में रखा। दरअसल, असली आरोपी की मृत्यु 26 साल पहले हो चुकी थी।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 19 August 2026, 9:59 AM IST
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Lucknow: राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले की गंगापुर सिटी सदर थाना पुलिस के पास धोखाधड़ी के एक मामले में स्थायी गिरफ्तारी वारंट था। यह वारंट अलीगंज (लखनऊ) के रहने वाले अखिलेश त्रिपाठी के नाम पर था, जिनकी मृत्यु 17 सितंबर 1998 को ही हो चुकी थी।

26 साल पहले मरे व्यक्ति के वारंट पर हुई गिरफ्तारी

इसके बावजूद, नाम और आंशिक पते में समानता के आधार पर राजस्थान पुलिस ने 15 फरवरी 2026 को गोमतीनगर (लखनऊ) में रहने वाले बेगुनाह यूपी पुलिस के सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया और अगले दिन उन्हें जेल भेज दिया।

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166 दिनों की बेगुनाही की सजा

मूल रूप से अंबेडकर नगर के रहने वाले पीड़ित सिपाही ने गिरफ्तारी के दौरान बार-बार कहा कि उन्हें गलतफहमी हुई है और उनका इस केस से कोई लेना-देना नहीं है। वारंट में दर्ज पिता का नाम भी सिपाही के पिता के नाम से अलग था।

इसके बावजूद पुलिस ने कोई जांच नहीं की और सिपाही को 166 दिनों तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा। आखिरकार मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने माना कि वारंट वाले व्यक्ति और इस सिपाही के बीच कोई संबंध नहीं था। मामले में सवाई माधोपुर की एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने कोर्ट में पेश होकर गलती मानते हुए माफी मांगी।

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बहाली के लिए भटक रहे सिपाही

1 अगस्त को मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रिहा होने के बाद सिपाही अखिलेश त्रिपाठी की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। जेल से बाहर आने के बाद वे अपनी ड्यूटी जॉइन करने के लिए लखनऊ पहुंचे।

उन्होंने अपने कमांडेंट और उच्च अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन कोर्ट के आदेश और सभी कानूनी दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद उन्हें अब तक जॉइनिंग नहीं दी गई है। बेगुनाह सिपाही आज भी इंसाफ और अपनी नौकरी वापस पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

Location :  Lucknow

Published :  19 August 2026, 9:59 AM IST

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