
प्रदूषण के खिलाफ महाअभियान (Img: Dynmaite News)
Noida : एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के कई शहरों की सड़कों का डिजाइन बदला जाएगा। नई योजना के तहत सड़कों को डस्ट फ्री, सुरक्षित और बेहतर कनेक्टिविटी वाला बनाया जाएगा। इसको लेकर PWD सचिव और आईएएस अफसर डॉ. लोकेश एम ने पूरा प्लान बताया है।
एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण ने पिछले कुछ वर्षों में लोगों की सेहत और जीवनशैली पर गंभीर असर डाला है। सर्दियों में धूल और स्मॉग की चादर के बीच लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अब केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एनसीआर के शहरों में धूल उड़ाने वाली सड़कों को डस्ट फ्री बनाने और सड़क नेटवर्क को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
दिल्ली स्थित केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. लोकेश एम, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) और सीआरआरआई के अधिकारियों की मौजूदगी में मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया गया। इस समझौते का उद्देश्य एनसीआर क्षेत्र की सड़कों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करना और धूल प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
इस परियोजना पर PWD सचिव और IAS अफसर डॉ. लोकेश एम ने डाइनामाइट न्यूज़ से बात करते हुए कहा, "योजना के तहत नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बागपत, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे शहरों में सड़क डिजाइन, इंटर-कनेक्टिविटी और ग्रीन बेल्ट विकसित करने का काम किया जाएगा। शुरुआती चरण में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ को प्राथमिकता दी जाएगी।" लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. लोकेश एम ने आगे बताया कि इन शहरों में सड़क डिजाइन को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। जिससे धूल कम उड़े, यातायात सुगम बने और सड़क सुरक्षा भी मजबूत हो सके।
डॉ. लोकेश एम ने आगे बताया, "योजना के तहत 12 मीटर या उससे अधिक चौड़ाई वाली सड़कों को शामिल किया गया है। इन सड़कों को पूरी तरह डस्ट फ्री बनाने के लिए विशेष डिजाइन तैयार किए जाएंगे। सड़कों के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी। साथ ही सेंट्रल वर्ज, फुटपाथ, रोड सेफ्टी फीचर्स और जल निकासी व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा।"
इस पूरी परियोजना में सीआरआरआई और एसपीए की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। दोनों संस्थान सड़कों का विस्तृत सर्वे करेंगे और वैज्ञानिक मानकों के आधार पर डिजाइन तैयार करेंगे। प्राधिकरण अपनी ओर से प्रस्तावित डिजाइन भेजेगा, जिसके बाद अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। सर्वे के दौरान सड़कों की मौजूदा स्थिति, ट्रैफिक दबाव, ग्रीन जोन, डस्ट कंट्रोल सिस्टम और सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़कों का नया स्वरूप तैयार होगा।
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डॉ. लोकेश एम का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल प्रदूषण कम करना नहीं है। सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क डिजाइन और इंटर-कनेक्टिविटी से ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। लोगों का सफर आसान और तेज होगा। इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है क्योंकि रोड सेफ्टी को योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तेजी से औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास हो रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी और कई बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। ऐसे में बेहतर सड़क नेटवर्क और मजबूत कनेक्टिविटी की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। नई योजना इन परियोजनाओं को भी सीधा लाभ पहुंचाएगी।
Location : Noida
Published : 11 June 2026, 3:39 PM IST